सीएम और केंद्रीय रेल मंत्री के दौरे से पहले वाराणसी में हाई अलर्ट! पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कसी कमर, बोले—ड्यूटी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री के प्रस्तावित वाराणसी दौरे को लेकर पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी पुलिस मशीनरी को अलर्ट मोड पर ला दिया है। शुक्रवार को पुलिस आयुक्त ने समस्त राजपत्रित पुलिस अधिकारियों की ब्रीफिंग कर वीआईपी सुरक्षा, रूट व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए। वहीं, बनारस रेलवे स्टेशन से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाए जाने के प्रस्तावित कार्यक्रम को सकुशल संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा।
पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी अधिकारी अपने-अपने ड्यूटी स्थल पर पुलिसकर्मियों की ब्रीफिंग कर उनकी जिम्मेदारियां तय करें। प्रत्येक पुलिसकर्मी निर्धारित समय से पहले ड्यूटी स्थल पर पहुंचे। ड्यूटी के दौरान अनावश्यक मोबाइल फोन का इस्तेमाल न हो और सभी पुलिसकर्मी पूरी सतर्कता के साथ अपने आसपास की गतिविधियों पर नजर रखें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या गतिविधि की सूचना तत्काल उच्चाधिकारियों को देने के निर्देश दिए गए।
ड्रोन, सीसीटीवी और रूफटॉप से होगी निगरानी
वीआईपी रूट, कार्यक्रम स्थल और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन तथा सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। महत्वपूर्ण स्थानों पर रूफटॉप ड्यूटी लगाकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया। कार्यक्रम स्थल के सभी प्रवेश और निकास द्वारों पर सघन चेकिंग होगी। बिना जांच किसी को प्रवेश नहीं मिलेगा तथा महिलाओं की चेकिंग महिला पुलिसकर्मियों द्वारा कराई जाएगी।
होटल, ढाबों, गेस्ट हाउस और अन्य ठहरने वाले स्थानों पर भी सघन चेकिंग एवं सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए। वीआईपी रूट की गलियों, कट, चौराहों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहेगा। आवश्यकता के अनुसार बैरिकेडिंग और रस्सों के जरिए भीड़ को नियंत्रित किया जाएगा। यातायात डायवर्जन और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करते हुए आमजन को कम से कम परेशानी हो, इसका भी ध्यान रखने को कहा गया।
रेलवे प्रशासन, आरपीएफ, जीआरपी और कमिश्नरेट पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर त्वरित सूचना आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को अपने क्षेत्रों का लगातार निरीक्षण करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जवाबदेही तय करने की हिदायत दी गई।
जनसुनवाई में लापरवाही पर सख्त रुख, अपराधियों पर जीरो टॉलरेंस
वहीं, पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने समस्त राजपत्रित अधिकारियों, थाना प्रभारियों एवं चौकी प्रभारियों के साथ अलग गोष्ठी कर जनसुनवाई, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने जनसुनवाई को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निर्देश दिया कि सभी अधिकारी निर्धारित समय पर अपने कार्यालयों में मौजूद रहें और फरियादियों की शिकायतें गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुनें।
IGRS, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ और पीजी पोर्टल से प्राप्त शिकायतों का निर्धारित समयसीमा में निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के साथ शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने पर भी जोर दिया गया। भूमि विवाद और स्थानीय विवादों में संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर समय रहते निरोधात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। यक्ष एप पर दर्ज बीट सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित विवादों और संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान करने को कहा गया।
अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस कमिश्नर ने जीरो टॉलरेंस अगेंस्ट क्राइम की नीति के तहत चेन स्नेचिंग, छेड़खानी, चोरी और नकबजनी जैसी घटनाओं में त्वरित विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए। आदतन एवं सक्रिय अपराधियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने और उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
हर थाने से रात में निकलेगा 25 प्रतिशत पुलिस बल
पुलिस की सड़कों पर मौजूदगी बढ़ाने के लिए पुलिस कमिश्नर ने बड़ा निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक थाने से उपलब्ध पुलिस बल का न्यूनतम 25 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से रात्रि गश्त पर निकलेगा। शाम के समय प्रमुख मार्गों, चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। संवेदनशील एवं अपराध संभावित क्षेत्रों में नियमित गश्त और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
जाम और अतिक्रमण पर भी होगी कार्रवाई
शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए थाना पुलिस और यातायात पुलिस को आपसी समन्वय से काम करने के निर्देश दिए गए। प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अनावश्यक जाम की स्थिति रोकने तथा यातायात बाधित करने वाले अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध संबंधित विभागों के साथ मिलकर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया।
60 और 90 दिन की विवेचनाओं पर विशेष निगरानी
लंबित विवेचनाओं को लेकर भी पुलिस कमिश्नर ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने 60 एवं 90 दिवस की निर्धारित समयसीमा के भीतर विवेचनाओं का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने, साक्ष्यों का समय से संकलन करने और अनावश्यक देरी रोकने के निर्देश दिए। विवेचकों के कामकाज की नियमित मॉनिटरिंग कर लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाने पर जोर दिया गया।
पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वीआईपी कार्यक्रम की सुरक्षा हो या आम जनता की शिकायतों का निस्तारण, पुलिस की कार्यशैली में सतर्कता, अनुशासन और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। अपराध नियंत्रण, प्रभावी गश्त और बेहतर जनसुनवाई में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।






