स्योहारा के अफशा नर्सिंग होम में प्रसव/ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला | डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पर (UPSHRC)-आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट

महिला की मौत पर मानवाधिकार आयोग सख्त, डीएम बिजनौर को नोटिस
स्योहारा के अफशा नर्सिंग होम में प्रसव/ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला | डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पर आयोग ने मांगी जांच रिपोर्ट
बिजनौर/स्योहारा। स्योहारा के अफशा नर्सिंग होम में प्रसव/ऑपरेशन के बाद महिला की मौत का मामला अब उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष पहुंचने के बाद जांच के अगले चरण में प्रवेश कर गया है। डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत पर आयोग ने जिलाधिकारी बिजनौर को नोटिस जारी कर आवश्यक जांच कर रिपोर्ट तलब की है।
मानवाधिकार आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार मामले में डायरी संख्या 6560/IN/2026 तथा केस/फाइल नंबर 17952/24/17/2026 दर्ज है। शिकायत की पंजीकरण तिथि 14 अगस्त 2026 है। आयोग के रिकॉर्ड में पीड़िता का नाम फाइज़ा तथा घटना स्थल अफशा नर्सिंग होम, स्योहारा और घटना की तारीख 13 अगस्त 2026 दर्ज है।
17 अगस्त को जारी हुआ नोटिस
आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज कार्रवाई के अनुसार 17 अगस्त 2026 को Notice Issued की कार्रवाई की गई। नोटिस जिलाधिकारी, बिजनौर को संबोधित है।
आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों का अवलोकन करने के बाद जिलाधिकारी, बिजनौर को मामले की आवश्यक जांच कराने तथा शिकायतकर्ता को जांच में सम्मिलित करते हुए आयोग को रिपोर्ट 22 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले को 23 अक्टूबर 2026 को आयोग के समक्ष सूचीबद्ध करने की बात भी रिकॉर्ड में दर्ज है।
मृत्यु के वास्तविक कारण की जांच की मांग
डॉ. तारिक़ ज़की की ओर से प्रस्तुत शिकायत में महिला की मृत्यु के वास्तविक कारण तथा उपचार की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में विभिन्न समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों का भी संदर्भ दिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार प्रसव के बाद महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मृत्यु हुई थी। मामले में परिजनों की ओर से कथित चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए गए थे, जबकि चिकित्सक पक्ष की ओर से मृत्यु का कारण हृदय संबंधी समस्या/हार्ट अटैक बताया गया था।

शिकायत में इन आरोपों को अंतिम अथवा सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है। बल्कि यह मांग की गई है कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार संबंधी दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार प्रक्रिया की जांच पर जोर
शिकायत में महिला के भर्ती रिकॉर्ड, केस शीट, प्रसव/ऑपरेशन से संबंधित अभिलेख, जांच रिपोर्ट, दवा एवं नर्सिंग रिकॉर्ड, मॉनिटरिंग चार्ट, रेफरल रिकॉर्ड तथा मृत्यु से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों को सुरक्षित कराने और उनकी विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
इसके साथ ही संबंधित नर्सिंग होम के पंजीकरण एवं अनुमति, वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, प्रशिक्षित स्टाफ तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति की भी जांच की मांग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में
शिकायत में घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए गए निरीक्षण अथवा जांच तथा नर्सिंग होम की नियामकीय निगरानी से संबंधित तथ्यों को भी स्पष्ट किए जाने की मांग की गई है।
इसका उद्देश्य केवल किसी निजी चिकित्सा संस्थान की भूमिका निर्धारित करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी है कि संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अपने नियामकीय दायित्वों का निर्वहन किया गया था या नहीं।
आयोग की कार्रवाई से बढ़ी जवाबदेही
मानवाधिकार आयोग द्वारा जिलाधिकारी को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब मामले में प्रशासनिक जांच और आयोग को प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। आयोग के निर्देश के अनुसार जांच में शिकायतकर्ता को भी सम्मिलित किया जाना है।
हालांकि नोटिस जारी होना किसी चिकित्सक, नर्सिंग होम या अन्य व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है। अभी मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट, उपलब्ध चिकित्सकीय अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
डॉ. तारिक़ ज़की की शिकायत का मूल उद्देश्य भी बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि महिला की मृत्यु के वास्तविक कारण, उपचार की प्रक्रिया और संबंधित नियामकीय व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना बताया गया है।
अब सभी की निगाहें 22 अक्टूबर तक जिलाधिकारी बिजनौर की ओर से आयोग को भेजी जाने वाली जांच रिपोर्ट और 23 अक्टूबर को होने वाली मामले की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।
नोट: यह समाचार उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग के उपलब्ध ऑनलाइन रिकॉर्ड, शिकायत में उल्लिखित तथ्यों तथा संबंधित समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी चिकित्सक, नर्सिंग होम अथवा अन्य व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। मानवाधिकार आयोग द्वारा अंतिम दोष निर्धारण किए जाने का कोई दावा नहीं किया जा रहा है। अंतिम स्थिति सक्षम जांच एवं आयोग की आगामी कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।






