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बच्ची से दरिंदगी मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, यूपी के DGP को ‘SIT’ गठन का आदेश, अस्पतालों की भी होगी जांच

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गाजियाबाद में पिछले महीने चार साल की मासूम बच्ची के साथ हुई कथित दरिंदगी और उसकी मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूपी के डीजीपी को निर्देश दिया कि मामले की जांच के लिए तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि पुलिस की अब तक की ढुलमुल कार्रवाई से पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है। निष्पक्ष जांच के लिए यह जरूरी है कि वरिष्ठ अधिकारी खुद पूरे मामले की निगरानी करें। पीठ में न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल थे।

IG रैंक के अधिकारी करेंगे लीड
सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ एसआईटी के गठन का आदेश दिया, बल्कि इसकी रूपरेखा भी खुद तय कर दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस एसआईटी का नेतृत्व कम से कम आयुक्त या महानिरीक्षक (IG) रैंक के अधिकारी करेंगे। सबसे अहम बात यह है कि इस टीम में महिला पुलिस अधिकारियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने समय सीमा तय करते हुए कहा कि शनिवार सुबह 11 बजे तक एसआईटी की अधिसूचना जारी हो जानी चाहिए। यह टीम उन तमाम बिंदुओं की जांच करेगी जो पीड़ित माता-पिता ने उठाए हैं और जिन्हें स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया था।

उन दो अस्पतालों पर भी गिरेगी गाज
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू उन निजी अस्पतालों का अमानवीय चेहरा था, जिन्होंने मरती हुई बच्ची को भर्ती करने से मना कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि एसआईटी उन दो निजी अस्पतालों की भूमिका की भी गहन जांच करेगी, जिन्होंने खून से लथपथ मासूम को इलाज से इनकार कर दिए थे। अदालत ने पहले भी इस पर नाराजगी जताते हुए इसे ‘असंवेदनशील दृष्टिकोण’ करार दिया था। बाद में बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

दो हफ्ते का दिया समय
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की रफ्तार तेज करने को कहा है। कोर्ट ने आदेश दिया कि एसआईटी को अपनी पूरक रिपोर्ट महज दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में पेश करनी होगी। जब तक यह रिपोर्ट दाखिल नहीं हो जाती, तब तक निचली अदालत में चल रही वर्तमान कार्यवाही पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, पुलिस की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।

क्या था पूरा मामला?
यह दर्दनाक वाकया 16 मार्च का है, जब एक पड़ोसी ने 4 साल की मासूम को चॉकलेट दिलाने का झांसा दिया और उसे फुसलाकर ले गया। जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो पिता ने तलाश शुरू की। पिता को वह पड़ोस में ही खून से लथपथ और बेहोश मिली थी। पुलिस की इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच में दिखाई गई कथित अनिच्छा पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल और 13 अप्रैल की सुनवाइयों में भी तीखी टिप्पणी की थी। 13 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच करने में गाजियाबाद पुलिस की अनिच्छा पर सवाल उठाए थे।

Sallauddin Ali

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