धामपुर-बिजनोर-उत्तरप्रदेश

अच्छा शिक्षक वही जो बच्चे की छुपी हुई काबिलियत को पहचान उसे सही दिशा दे।”-अकील अहमद इस्लाही

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अकील अहमद इस्लाही ने अध्यापको को सिखाएं शिक्षण गुण

धामपुर ( ताजपुर ) / बरेली के प्रख्यात इस्लामी विद्वान व शिक्षाविद् मौलाना अकील अहमद इस्लाही साहब का आज जनपद बिजनौर की तहसील धामपुर आगमन हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र के ताजपुर मे कई इंग्लिश मीडियम एवं इस्लामिक शिक्षण संस्थानों में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें उन्होंने बच्चों की तालीम को बेहतर से बेहतरीन बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के दौरान मौलाना अकील अहमद इस्लाही साहब ने मौलाना सिराजुद्दीन नदवी के मार्गदर्शन में संचालित जमीयतुल फैसल, शाहीन एकेडमी और शिबली पब्लिक स्कूल के शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया।

उन्होंने अपने प्रभावशाली और दिलकश अंदाज़ में शिक्षकों को बताया कि किस प्रकार बच्चों को पढ़ाया जाए ताकि वे न केवल शिक्षा में बल्कि अपने व्यक्तित्व विकास में भी आगे बढ़ सकें। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “तालीम सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों के अंदर सोचने-समझने की सलाहियत, अख़लाक (चरित्र) और आत्मविश्वास पैदा करना भी उतना ही जरूरी है। एक अच्छा शिक्षक वही है जो बच्चे के अंदर छुपी काबिलियत को पहचान कर उसे सही दिशा दे।” उन्होंने शिक्षकों को कुछ अहम बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी, बच्चों को रटने के बजाय समझने पर ज़ोर दिया जाए, क्लासरूम को दिलचस्प और इंटरएक्टिव बनाया जाए, हर बच्चे की अलग क्षमता को समझकर उसी के अनुसार पढ़ाने का तरीका अपनाया जाए।, दीनी और दुनियावी तालीम के बीच संतुलन कायम रखा जाए, बच्चों में अच्छे अख़लाक और अनुशासन की आदत डाली जाए।
मौलाना साहब ने यह भी कहा कि “अगर शिक्षक अपने पेशे को इबादत समझकर निभाएं, तो आने वाली नस्लें खुद-ब-खुद कामयाबी की बुलंदियों को छू लेंगी।” इस बैठक की अध्यक्षता स्वयं मौलाना अकील अहमद इस्लाही साहब ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन मौलाना जुल्फकार ने किया।
बैठक में प्रधानाचार्य सरताज अहमद, प्रधानाचार्य सुहाना परवीन, कारी गौहर, दानिश अंसारी, मास्टर माज़, मास्टर रईस, सदफ परवीन, अफशा परवीन, अक्सा परवीन, मांतशा परवीन, अफनान सिराज सहित कई दर्जन शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में मौलाना सिराजुद्दीन न्दवी सहित सभी शिक्षकों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और मौलाना साहब का आभार व्यक्त किया।

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