मानवाधिकारो की आवाज़ बने डॉ. तारिक ज़की-प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ़ आयोग पहुँचे – “यह सिर्फ दुर्घटना नहीं, संस्थागत विफलता है” – डॉ. ज़की
मानवाधिकारो की आवाज़ बने डॉ. तारिक ज़की-प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ़ आयोग पहुँचे
“यह सिर्फ दुर्घटना नहीं, संस्थागत विफलता है” – डॉ. ज़की
लखनऊ/बिजनौर।
आईरा न्यूज़ नेटवर्क को प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रख्यात मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं सामाजिक चिंतक डॉ. तारिक ज़की ने बिजनौर जनपद में हुई एक दर्दनाक घटना को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
प्रकरण के अनुसार नजीबाबाद क्षेत्र में सार्वजनिक मार्ग पर स्थित एक जर्जर एवं खतरनाक वृक्ष के गिरने से एक युवा 28 वर्षीय नागरिक की असामयिक मृत्यु हो गई। आरोप है कि पूर्व में कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद आवश्यक निरोधात्मक कार्यवाही नहीं की गई।

आयोग द्वारा शिकायत को डायरी संख्या 1243/IN/2026 एवं केस/फाइल संख्या 3071/24/17/2026 दिनांक 19 फरवरी 2026 को पंजीकरण कर लिया गया है
“यह सिर्फ दुर्घटना नहीं, संस्थागत विफलता है” – डॉ. ज़की
डॉ. ज़की ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि सार्वजनिक मार्गों पर मौजूद संभावित खतरे को प्रशासन द्वारा अनदेखा किया जाता है और उसके परिणामस्वरूप किसी नागरिक की मृत्यु होती है, तो यह मात्र दुर्घटना नहीं बल्कि Institutional Failure है।
उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य पर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
शिकायत के अनुसार दिनांक: 18 फरवरी 2026 को सार्वजनिक मार्ग नजीबाबाद बुंदकी रोड,जनपद बिजनौर पर स्थित एक जर्जर वृक्ष के गिरने से युवक अनस खान,28 वर्ष, ग्राम इस्सेपुर,थाना झालू की मृत्यु हो गई, आरोप है कि पूर्व में प्रशासन को संभावित खतरे के बारे में अवगत कराया गया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई।
डॉ ज़की ने आयोग से मांग की हैं की
पीड़ित परिवार को सम्मानजनक आर्थिक मुआवज़ा
जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई
राज्यव्यापी स्तर पर खतरनाक वृक्षों का सर्वेक्षण
भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम हेतु नीतिगत निर्देश लागू किये जायें
डॉ. तारिक ज़की लंबे समय से मानवाधिकार संरक्षण, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिक सुरक्षा के मुद्दों पर सक्रिय हैं। वे विभिन्न मंचों पर संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं।
उनकी इस पहल को मानवाधिकार क्षेत्र में प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।






