काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप सेल द्नारा छात्रों के लिए 21वीं सदी कौशल के विभिन्न आयामों से दक्ष कराने हेतु कार्यक्रम का आयोजन

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय द्नारा छात्रों के लिए 21वीं सदी कौशल विषयक पैनल संवाद का आयोजन प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप सेल द्वारा दिनांक 07 फरवरी, 2026 को किया गया । इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को वैश्विक परिवेश में आने वाली चुनौतियों के संबंध में दक्ष करना और उनके निवारण के लिए 21 वीं सदी कौशल दक्षता के विभिन्न आयामों से अवगत कराना साथ ही बदले हुए परिवेश को ध्यान में रखते हुए ईक्यू और आईक्यू में संबंध बनाने पर जोर दिया गया जो उन्हें अपने जीवन करियर को बेहतर ढंग से प्रबंधित करनेमें सक्षम बनायेगा ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ विश्वविद्यालय के कुलगीत द्वारा किया गया । इसके उपरांत प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप सेल के समन्वयक प्रो. अमित गौतम तथा ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी डा. उमेश सिंह द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया ।
सेल के समन्वयक प्रो. अमित गौतम ने अपने स्वागत संबोधन में उपस्थित अतिथियों का अभिनंदन करते हुए प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप सेल की गतिविधियों, उसकी भूमिका तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और राष्ट्रनिर्माण में उसकी ऐतिहासिक भूमिका पर संक्षिप्त प्रकाश डाला । उन्होंने छात्रों से पीरामल फाउण्डेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से अपने करियर के चयन में गॉधी फेलोशिप कार्यक्रम से जुड़ने की सलाह दी ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह ने छात्रों को विकसित भारत–2047 के राष्ट्रीय संकल्प की स्मृति कराते हुए कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए युवाओं का सर्वांगीण विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों को केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और नेतृत्व के स्तर पर भी सशक्त बनाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है—और यही महामना मालवीय जी का स्वप्न भी रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य सत्र का नेतृत्व पीरामल फाउंडेशन के गांधी फेलोशिप कार्यक्रम के प्रमुख संस्थापक निदेशक श्री विवेक शर्मा ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी कौशल के विकास के लिए उपयुक्त परिवेश अनिवार्य होता है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सीखना कैसे सीखें और ध्यानपूर्वक सुनने की क्षमता विकसित करना, 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से है । श्री शर्मा ने कहा कि आज के समय में सफलता का अर्थ केवल आगे बढ़ना नहीं, बल्कि फलना-फूलना (Thriving) है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक समय के अनुरूप अपनी योग्यताओं, क्षमताओं और दृष्टिकोण का निरंतर विकास करें।
इसके पश्चात पीरामल फाउंडेशन के गांधी फेलोशिप कार्यक्रम के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक श्री अवधेश मिश्र ने नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का वास्तविक मूल्य तभी स्थापित होता है जब व्यक्ति समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे। उन्होंने छात्रों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि उसने समाज को क्या योगदान दिया है। साथ ही उन्होंने छात्रों को संघर्ष प्रबंधन के कुशल एवं प्रभावी कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जो किसी भी नेतृत्वकर्ता की मूल पहचान होती है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्न-उत्तर सत्र ने संवाद को और अधिक जीवंत बना दिया, जहाँ छात्रों ने वक्ताओं से सीधे संवाद कर नेतृत्व के मार्ग, करियर विकास और सामाजिक प्रभाव को लेकर व्यावहारिक स्पष्टता प्राप्त की। यह सत्र छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणास्पद सिद्ध हुआ।
सत्रांत में कार्यक्रम का समन्वयन कर रहे काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट अधिकारी डा. उमेश सिंह ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं छात्रों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे संवादात्मक कार्यक्रम छात्रों को न केवल रोजगार के लिए, बल्कि जिम्मेदार और मूल्य-आधारित नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं ।
उपरोक्त कार्यक्रम में पीरामल फाउण्डेशन की एच आर टीम की तरफ से सुश्री निशा, राखी मलिक, शुभम और प्लेसमेंट एवं इंटर्नशिप सेल के छात्र प्लेसमेंट समन्वयक, चन्दन कुमार सिन्हा, आकांक्षा, सिद्धि, प्रतिभा, निकिता, निष्ठा, प्रियंबदा, समृद्धि आदि ने अपना योगदान दिया । इस अवसर पर सेल के कर्मचारी आलोक मिश्र, संजय कुमार यादव, रवि कुमार पटेल, एसआरके इन्टर्न मुस्कान उपस्थित रहे।


















