महामारी में नल को बिना छूए पैरों से नल चलाकर पानी निकालने की तकनीक को किया दिनेश चौधरी ने विकसित
करनाल: प्रधानमंत्री मंत्री नरेन्द्र मोदी के कथन आपदा से अवसर में बदलने को जिले के मुखापुरी गांव के रहने वाले शिक्षक दिनेश चौधरी ने कोरोना महामारी में पानी के नल को बिना छुए प्रयोग करने की नायाब तरीका ईजाद किया है। इस पहल के पीछे उनका उद्देश्य जहां कोरोना के संक्रमण को रोकने का प्रयास है वही विद्यार्थियों को कौशल विकास के लिए प्रेरित करना है। उनका मानना है विद्यार्थियों में समालोचनात्मक सोच विकसित हो। उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने उनके द्वारा सचिवालय के प्रथम तल पर बने पीने के पानी की नल पर इस तकनीक का प्रयोग किया। डीसी द्वारा उनके इस तकनीक से बनाए गए नल का पैडल दबाकर उद्घाटन किया। शिक्षक दिनेश की इस अनूठी पहल की उपायुक्त ने काफी सहराना की है।
शिक्षक दिनेश ने बताया कि कोविड 19 के प्रोटोकॉल में मास्क पहना व 2 गज की दूरी बनाए रखना विशेष हिदायतें है। परन्तु नल से बिना दूरी कैसे पानी पिया जाए, इस पर उन्होंने काम शुरु किया, परिणाम स्वरूप उन्हें कामयाबी मिल गई। अब उनके द्वारा ऐसा तरीका ईजाद किया गया कि अब नल को बिना हाथ लगाए पैरों के माध्यम से चलाया जा सकेगा। इससे कोविड के नियमों का पालन भी रहेगा और इससे किसी को संक्रमण का खतरा नहीं होगा और आसानी से पानी भी प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने इस तकनीक की जानकारी उपायुक्त निशांत यादव को दी और उनके सामने इस तकनीकी का प्रैक्टिकल किया गया तो उन्होंने उनके इस कार्य की सराहना की और कहा कि जल्दी ही ऐसी तकनीक से जिले के सभी स्थानों पर नल लगाया जाएगा ताकि लोगों को बिना कोरोना के संक्रमण के पीने का पानी मिल सके।
शिक्षक दिनेश राजकीय संस्कृति सीनियर सैकैडरी स्कूल निगदू मे शारीरिक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उनकी कत्र्तव्यनिष्ठा का देखते हुए वर्ष 2021 में गणतंत्र दिवस पर उन्हें सम्मानित किया गया। दिनेश ने बताया कि उनका सामाजिक कार्यों के प्रति अच्छा रूझान है, वह ऐसा करना चाहते हैं जिससे लोगों को लाभ मिले। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य ख्याति प्राप्त करना या पैसा कमाना नहीं बल्कि सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देकर प्ररेणा बनना है। उन्होंने बताया कि जो इस नई तकनीक से नल बनाए जा रहे हैं इन पर 100 रुपये से 150 रुपये खर्च आता है। डीसी महोदय जिले में जितने भी इस तकनीक लगवाएंगे वह उन्हें निशुल्क लगाएंगे। उनके द्वारा इन नलों को घर पर तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रचनात्मक कार्य के लिए प्रिसिंपल धर्मपाल बुढेडा, प्राध्यापक जयभगवान शर्मा व प्राध्यापक सुलिंदर मेहला का भी सहयोग मिलता रहा।


















