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बिजनौर में वन हरियाली की हत्या नहीं सहेगी -राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार ‘भोले’ एडवोकेट(भाकियू सामाजिक)

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बिजनौर में वन हरियाली की हत्या नहीं सहेगी भाकियू सामाजिक

बिजनौर के नहटौर क्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन सामाजिक (भाकियू सामाजिक) ने कल ही गांव-गांव जाकर पर्यावरण संरक्षण अभियान चलाया था। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार ‘भोले’ एडवोकेट के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने दर्जनों गांवों में वृक्षारोपण पर ग्रामीणों को पेड़ों के महत्व के प्रति जागरूक किया।

लेकिन विडंबना देखिए—जहां एक तरफ संगठन हरियाली बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग खुद हरियाली की जड़ें काटने में लगा हुआ है।

शिव कुमार (भोले) एडवोकेट ने कहा
क्या फ़ायदा हमारे पेड़ लगाने का, जब सरकारी विभाग ही कमीशनखोरी और लालच के लिए हरे-भरे पेड़ों को ठेकेदारों से मिलकर कटवा रहा है? ये विकास नहीं, विनाश है।
सरकार हर साल पर्यावरण बजट जारी करती है, लेकिन सवाल ये है — वो पैसा जाता कहां है? हमें तो कटते पेड़ और बढ़ती संपत्ति ही दिख रही है।
भाकियू सामाजिक ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि —
✅ वन विभाग के ऐसे अधिकारियों की संपत्ति की जांच करवाई जाए।

✅ हम अपने जनपद में वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारी का होना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।

वन विभाग का दावा है कि वह केवल सूखे और जर्जर पेड़ों की कटाई की जा रही है,
लेकिन स्थानीय लोगों द्वारा लिए गए फोटो और वीडियो, साथ ही मौके पर मौजूद ग्रामीणों के कहने अनुसार कई बार साफ हो चुका है कि काटे जा रहे पेड़ पूरी तरह हरे-भरे और स्वस्थ हैं।
इस पर जब भाकियू सामाजिक ने विभाग से संवाद किया, तो वन विभाग के अधिकारियों का कहना था:
CBI से जांच कराओ, ED भी सही जांच करती है।
यह बयान केवल गैर-जिम्मेदाराना नहीं, बल्कि अहंकार, भ्रष्टाचार और जवाबदेही से बचने की घिनौनी कोशिश है। जो विभाग जनता की बात सुनने की जगह CBI-ED की धमकी देने लगे, उसे अब चुप रहने का नहीं, खुलकर जवाब देने का समय आ गया है।
वन विभाग की दोहरी बात और ज़मीनी सच्चाई: को लेकर आज दिनांक 16/06/2025 भाकियू सामाजिक के जिलाध्यक्ष ज्ञानचंद प्रजापति, युवा जिलाध्यक्ष विनीत तोमर, सचिन कुमार, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष संजय सिंह आदि ने जिलाधिकारी महोदय बिजनौर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।
भाकियू सामाजिक ने
साफ़ कर दिया है कि वन विभाग के भ्रष्टाचार पर अब चुप नहीं बैठा जाएगा।
हर गांव में अब “एक पेड़ – एक प्रहरी” अभियान चलेगा, ताकि हर पेड़ कटाई की निगरानी की जा सके।

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