आयुर्वेद – स्वस्थ रहें निरोग रहेंक्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, बिजनौर, डा० सर्वेश चन्द्रा

आयुर्वेद – स्वस्थ रहें निरोग रहें
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, बिजनौर, डा० सर्वेश चन्द्रा
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BIJNOR- 10 NOVEMBER, 2023
आयुर्वेद संसार की प्राचीन चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। इसका सम्बन्ध हमारे शरीर को स्वस्थ रखने एवं बीमारी हो जाने पर उसे दूर करके आयु को बढाने से है। प्राय: सभी जानते है कि इस संसार में मनुष्य तो क्या सभी जीव, रोग, अपमान, वियोग से बचने का प्रयास करते है। इसी क्रम में आयुर्वेद का उद्भव हुआ। आयुर्वेद पद्धति अजारो वर्षो से हमारे जीवन में बसी हुई है। आयुर्वेद शब्द का अर्थ है जीवन का विज्ञान। साधारण भाषा मे कहें तो जीवन का ठीक प्रकार से जीने का विज्ञान ही आयुर्वेद है। महर्षि चरक ने चरक संहिता नामक ग्रंथ में आयुर्वेद की परिभाषा देते हुए भी कहा है- जिसमें हितायु अहितायु, सुखायु एवं दुखायु का वर्णन है तथा जिसमें आयु के लिए हितकर, अहितकर, द्रव्य, गुण कर्म का वर्णन है वह आयुर्वेद है। आयुर्वेद शास्त्र हमेशा हितायु का प्रवर्तक रहा है जिसमें हमें अपने साथ-साथ चारों ओर सभी प्राणियों जीव-जन्तु पेड-पौधो प्रकृति वातावरण आदि सभी का संवर्धन एवं संरक्षण करते हुये अपने जीवन को निरोग रखते हुये सर्वोत्तम लक्ष्य प्राप्ति कर सकते हैं।
मनुष्य जीवन का वास्तविक अद्देश्य पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति है जो कि सर्वदा स्वस्थ शरीर के माध्यम से ही संभव है। अत: अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता पर रखकर ही इस परम उद्देश्य को प्राप्त किया जा सकता है। आयुर्वेद शास्त्र के मूलभूत सिद्धांत ही इसकी श्रेष्ठतम निधि है। जिनका नित्य प्रतिदिन पालन करके हम सर्वदा स्वस्थ रह सकते हैं। आज की भागम भाग एवं भोग विलासिता पूर्ण जीवनशैली में आयुर्वेदोक्त दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋतुचर्या एवं सदव्रत पालन से भी हम अपने आप को हमेशा स्वस्थ रख सकते हैं।
हम अपने दैनिक जीवन में किसी को पेटदर्द होने पर या गैस की समस्या होने पर अजवायन, हींग लेने को कहते है, खासी, जुकाम, गला खराब होने पर कहते है अदरक, तुलसी, काली मिर्च, वाली चाय ले लो। हमें अपने घर के आंगन में, रसोईघर में ही कई एसे पदार्थ मिल जाते हे जिन्हे औषधि के रूप में प्रयुक्त करते है। इस प्रकार आयुर्वेद विघा हमारे जीवन से अलग नही है। निष्कर्ष के रूप में आयुर्वेद एक चिकित्सा पद्धति होने के साथ-साथ साधना पद्धति भी है।


















