नई दिल्ली

संसद में एक बार फिर होंगे मोदी और राहुल आमने-सामने

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संसद में एक बार फिर होंगे मोदी और राहुल आमने-सामने
सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला, पहली किश्त सजा पर रोक
Delhi

देश की सर्वोच्च अदालत ने मोदी सरनेम मामले में राहुल गांधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलों के बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल के सजा पर रोक लगा दी। इस आदेश के आने के बाद उनके सदस्यता बहाल होने की कवायद अब शुरू हो जाएगी। अदालत के द्वारा अगर इसके बाद कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है। सायं साढ़े तीन बजे एआईसीसी मुख्यालय में राहुल पहुंचे। राहुल का मुखौटा लगाए हुए कार्यकर्ताओं ने ढोल नगाड़ों के साथ उनका जबर्दस्त स्वागत किया। राहुल के साथ पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी, संगठन सचिव केसी वेणुगोपाल भी मौजूद थे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि’ सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान की जीत हुई। सत्यमेव जयते की जीत हुई है। उन्होंने कहा कि अभी संविधान जिंदा है. न्याय मिल सकता है इसका ये उदाहरण है। खरगे ने कहा कि ये केवल राहुल गांधी नहीं आम लोगों की जीत है। एक व्यक्ति जो सच्चाई के लिए और देश हित के लिए लड़ता है. मंहगाई, बेरोजगारी के खिलाफ लड़ता है, भारत जोड़ो यात्रा में मिले लोगों की, सबकी दुआ से ये जीत मिली है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर करारा तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ 24 घंटे में सदस्यता खत्म करने का आदेश आया। अब देखना है कि कितनी जल्दी सदस्यता बहाल करते हैं। सुप्रीम कोर्ट और संसद के बीच कुछ किलोमीटर की ही दूरी है। उम्मीद है रात तक सदस्यता बहाल कर दी जाए। मोदी सरकार और भाजपा को अपनी गलती का एहसास हुआ होगा। ये फैसला वायनाड के मतदाताओं की जीत है।
वहीं खरगे के बयान के बाद राहुल गोधी ने लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों सच्चाई की जीत होती है। मगर जो भी हो मेरा रास्ता साफ है कि मुझे क्या करना है, मेरा क्या काम है, उसके बारे में मेरे दिमाग में बिल्कुल क्लैरिटी है, जिन लोगों ने हमारी मदद की, जनता ने जो प्यार और सपोर्ट दिया उसके लिए मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और तत्काल राहुल की सांसदी बहाल करने का अनुरोध किया। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने फैसले की कॉपी आने तक इंतजार करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राहुल गांधी को दी गई दो साल की सजा पर हैरानी जताते हुए कहा कि कोर्ट की तरफ से किसी मानहानि मामले में दो साल की सजा सुनाया जाना हैरान करता है। ये कोई अपहरण, बलात्कार और हत्या का मामला नहीं है, जिसमें दोषी को अधिकतम सजा जाए। अधिकम सजा का असर राहुल गांधी को अगले 8 साल तक के लिए चुप कराने जैसा होगा, क्योंकि इस फैसले के बाद वो कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
इस पर न्यायाधीश बीआर गवई ने सिंघवी को टोकते हुए कहा कि फैसला सुनाने वाले जज राहुल गांधी के पुराने आपराधिक मामलों की भी बात करते हैं। इस पर सिंघवी ने जवाब देते हुए कहा कि राहुल के खिलाफ इससे पहले एक मानहानि का मामला दर्ज था, जिसमें उन्होंने माफी मांग ली थी। इसके अलावा सभी मामले भाजपा कार्यकर्ताओं की तरफ से की गई शिकायतों के आधार पर दर्ज किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में वकालत कर रहे निशांत मंडल ने बताया कि इस फैसले से राहुल गांधी को जो राहत मिली है उसके तीन मजबूत आधार हैं जो उनके वक्ष में जाते हैं। पहला ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में अधिकतम दो साल की सजा दी थी लेकिन उसके लिए सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कोई ठोस आधार नहीं दिया। दूसरा इस फैसले से राहुल गांधी के सार्वजनिक जीवन का अधिकार प्रभावित हुआ है।
तीसरा इस फैसले से राहुल गांधी के लोकसभा क्षेत्र वायनाड के मतदाजाओं का भी अधिकार भी सजा से प्रभावित है इसलिए उस पर रोक लगाना जरूरी है। वकील निशांत मंडल बताते हैं कि अब राहुल गांधी को लोकसभा सचिवालय को आवेदन देना होगा। इसमें राहुल जानकारी देंगे कि उनकी सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस आवेदन के साथ उन्हें कोर्ट के फैसले की कॉपी भी लगानी होगी। इसके बाद सचिवालय सचिवालय उनकी सदस्यता बहाली का आदेश जारी करेगा।

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