कन्नौज-उत्तरप्रदेश

सिलेण्डर महंगा हुआ तो विद्यालय में चूल्हे पर बन रहा भोजन

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सिलेण्डर महंगा हुआ तो विद्यालय में चूल्हे पर बन रहा भोजन

  • एक वर्ष से जसोदा स्कूल में बन रहा खाना
  • चूल्हे पर खाना बनते- फोटो खींचते देख प्रधानाचार्य हुए आग बबूला
  • फोटो खींचने पर प्रधानाचार्य व पत्रकार के बीच हुई तू तू में में
  • ऐसे विद्यालय पर अधिकारी जाना उचित नही समझ रहे?
  • आखिर ऐसे विद्यालयो पर क्यों नही होती कारवाही
  • सरकारी पैसे का हो रहा खुलेआम बंदर बांट

कन्नौज-अवनीश चंद्र तिवारी

     सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा के साथ साथ ड्रेस, जूता, मोजा, किताबे, खाना व खाना बनाने के लिए गैस,सप्ताह में एक दिन फल,दूध  सरकार द्वारा दिया जा रहा है परंतु स्कूल प्रधानाचार्य की लापरवाही से स्कूलों में रसोइया चूल्हे पर खाना बना रही हैं और यह निरंतर एक वर्ष से बनता चला आरहा है।
             बताते चले जसोदा कंपोजित विद्यालय में तीन सौ करीब छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। उस हिसाब से चार सलेंडर खाना बनाने में होने चाहिए। 

इस बात की सूत्र से जब आईरा न्यूज़ नेटवर्क के पत्रकारों को हुई तो पत्रकार ने गुरुवार को मौके पर पहुंच कर कम्पोजिट विद्यालय जसोदा जाकर देखा तो रसोइया मीरा और वंश कुमारी चूल्हे पर खाना बना रही थी। कम्पोजित विद्यालय में मीरा, राम बेटी, वंश कुमारी माया देवी व राम बेटी रसोइया हैं। इस विषय पर जब कुछ छात्रों व उनके स्वजनो से संवाददाता ने जानकारी ली तो बताया कि जुलाई से अब तक चूल्हे पर ही खाना बन रहा हैं।
जैसे ही टीम ने लकड़ी से खाना बनने की फोटो खींचने की कोशिश की तो फोटो खींचता देख प्रधानाध्यापक आग बबूला हो गया और कैमरे जबरदस्ती बन्द करा दिया जिस पर पत्रकार व प्रधानाध्यपक के बीच तू तू में में भी हुई। वही प्रधानाध्यापक अशीष मिश्रा ने कहा कि सिलेंडर कल ही खत्म हुआ है और सिलेंडर आ नही सका जिस वजह से भोजन की व्यवस्था चुले पर की गई ।परंतु सोचने बाली बात यह है कि क्या सभी सलेंडर एक साथ खत्म हुए हैं।
जब इस विषय पर खंड शिक्षा अधिकारी अविनाश दीक्षित से जानकारी की गयी तब उन्होंने कहा कि चूल्हे पर खाना बनना कोई गलत बात नहीं है बस व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे जिससे भोजन समय पर छात्रों को उपलब्ध होता रहे।विषय सिलेंडर य चुले का नही है हकित तो जब सिलेंडर सरकार दे रही है तो सिलेंडर पर खाना क्यों नही बन रहा?और चुले पर बन रहा एक वर्ष से तो चुले पर बनने पर लकड़ी खर्चा कम आता है सभी जानते हैं आखिर सिलेंडर का पैसा कहा और किसके पास जा रहा है यह एक सोचनीय विषय है।।

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