अपनी औलाद को गरीबी के डर से क़त्ल न करो, हम उनको भी रोज़ी देंगे और तुमको भी”
दिल्ली-आयान शादाब

क़ुरआन में अल्लाह कहता है, “अपनी औलाद को गरीबी के डर से क़त्ल न करो, हम उनको भी रोज़ी देंगे और तुमको भी”
यह दावा भविष्य में बढ़ती हुई आबादी रिज़्क़ की तंगी की समस्या पैदा नहीं कर सकेगी, मगर इस के 1000 साल बाद अंग्रेज अर्थशास्त्री रॉबर्ट माल्थस जिसने 1798 में जनसंख्या के नियम पर एक किताब लिखी,
an essay on the principal of population as it affects the future improvement of society”
माल्थस का कहना था कि अगर जनसंख्या को अनियंत्रित छोड़ दिया जाए तो वह ज्योमेट्रिक ( 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64….) हिसाब से बढ़ती है जबकि आहारीय वस्तु केवल अरिथमेटिक (1, 2, 3, 4, 5, 6, 7…) हिसाब से बढ़ती है, यानि इंसानी आबादी में वृद्धि बहुत तेज गति से होती है और भोज्य पदार्थों में वृद्धि बहुत धीमी गति से, इस आधार पर ज़मीन पर इंसानी नस्ल को बचाने के लिए आबादी पर नियंत्रण किया जाए, वरना बहुत जल्द ऐसा होगा कि इंसान भुखमरी से मरने लगेंगे,
माल्थस की मौत को 185+ साल गुजर चुके हैं मगर उसकी गंभीर भविष्यवाणी अभी तक पूरी नहीं हुई, दुनिया की आबादी ज्योमेट्रिक हिसाब से दोगुनी चौगुनी भी हो गयी, जैसा कि उसने कहा था, उस समय की आबादी के मुकाबले में आज की दुनिया की आबादी लगभग 8 गुना हो चुकी है, लेकिन आहारीय वृद्धि भी कदम से कदम मिलाकर चल रही है, और इंसान की मौजूदा नस्ल को इतिहास का सबसे बढ़िया आहार मिल रहा है,

















