Ukraine is under attack but Indian student Rishabh Kaushik refusing to return home without his pet dog Malibu

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कीव: युद्धग्रस्त यूक्रेन में हर पल जान का खतरा बना हुआ है, लेकिन एक भारतीय छात्र वहां से बाहर निकलने को तैयार नहीं है. इसके पीछे की वजह है उसका अपने पालतू कुत्ते ”मालीबू” के लिए प्यार. इस छात्र का नाम है ऋषभ कौशिक. वह यहां खार्कीव (Kharkiv) नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ रेडियो इलेक्ट्रॉनिक्स से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट से पर एक वीडियो संदेश जारी किया है.
मैं अपने कुत्ते ”मालीबू” को यहां अकेला छोड़कर नहीं जा सकता
ऋषभ का कहना है कि उन्होंने अपने कु्त्ते के साथ वापस भौरत लौटने के लिए जरूरी सहमतियां लेने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. ऋषभ कौशिक ने कहा, इसके बाद मैंने फैसला किया है कि अगर मेरा कुत्ता मेरे साथ नहीं जाएगा, तो मैं भी वापस भारत नहीं जाऊंगा. मुझे पता है कि यूक्रेन में रहना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन मैं अपने कुत्ते ”मालीबू” को यहां अकेला छोड़कर नहीं जा सकता.
ऋषभ कौशिक 21 साल के हैं. उन्हें ‘मालीबू’ एक पड़ोसी से मिला था जो उसे सड़क से बचा कर लाए थे. वह बताते हैं कि गुरुवार को जब रूस ने खार्कीव पर हमला किया, उसके कुछ दिन पहले ही वह अपने कुत्ते के साथ यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे थे. ऋषभ कहते हैं, ”मैंने मालीबू के साथ 23 फरवरी को खार्कीव छोड़ा था और रूस ने 24 फरवरी की सुबह यूक्रेन पर हमला कर दिया.”
लौटने की पूरी व्यवस्था थी, लेकिन बिना कुत्ते के आना स्वीकार नहीं
ऋषभ का परिवार देहरादून में रहता है. उनके परिवार ने उन्हें दुबई के रास्ते वापस भारत लाने के लिए जरूरी कागजात और हवाई जहाज के टिकट की व्यवस्था 20 फरवरी को कर दी थी. लेकिन ऋषभ ने बिना मीलाबू को साथ लिए भारत लौटने से मना कर दिया. ऋषभ का कहना है कि हवाई जहाज में जब उनके पालतू कुत्ते को भी साथ ले जाने की इजाजत मिल जाएगी तभी वह यूक्रेन से लौटेंगे. उन्होंने बताया कि कुत्ते के साथ उड़ने के लिए एनओसी हासिल करने की प्रक्रिया उन्होंने 20 फरवरी को शुरू की थी. इसके लिए उन्होंने भारतीय दूतावास को ईमेल भी भेजा था.
ऋषभ कौशिक ने परमिशन के लिए भारतीय दूतावास से किया संपर्क
ऋषभ बताते हैं, ”मेरे साथ मेरे कुत्ते को उड़ान भरने की परमिशन के लिए उन्होंने मुझसे कुछ कागजात मांगे. इतने कठिन हालात में भी मैंने उन्हें सारे कागजात उपलब्ध कराए. लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने कुछ और कागजात की मांग की जिसे उपलब्ध करा पाना मेरे लिए संभव नहीं था. क्योंकि तब तक युद्ध शुरू हो चुका था. मैने उनसे मिन्नतें कि लेकिन उन्होंने इजाजत नहीं दी. मेरी देखभाल करने के लिए तो मेरा परिवार है. लेकिन मालीबू का क्या? मैं ही उसका परिवार हूं.”
”मैंने मीलाबू को यहां छोड़ दिया तो उसकी देखभाल कौन करेगा”
ऋषभ कौशिक का कहना है कि अगर मैंने उसको (अपने पालतू कुत्ते को) यहां छोड़ दिया तो उसकी कोई देखभाल नहीं करेगा. अगर मैं उसे डॉग शेल्टर में छोड़ दूं तो मुझे पूरा विश्वास है कि युद्ध तेज होते ही, शेल्टर के मैनेजर अपनी जान बचाने के लिए उसे छोड़कर भाग जाएंगे. मैंने उसके देखभाल की जिम्मेदारी ली है. मैं उसकी देखभाल करुंगा, चाहे जो कुछ हो जाए. ऋषभ के पिता मधुकांत कौशिक कहते हैं, ”वह अपने कुत्ते को छोड़कर आने के लिए किसी भी कीमत पर राजी नहीं है. हमें उम्मीद है कि भारतीय दूतावास से इजाजत मिलेगी और दोनों यूक्रेन छोड़कर सही-सलामत घर लौटेंगे.”
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