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जिस NATO की वजह से दुनिया से टकराने को तैयार है रूस, आखिर क्या है उसके विवाद की जड़

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Russia Ukraine Conflict : रूस और यूक्रेन के बीच कई महीनों से चले आ रहे तनाव को रूस ने गुरुवार को युद्ध तक पहुंचा दिया. रूस का यूक्रेन पर हमला जारी है, लेकिन एक सवाल जो कई लोगों के मन में है कि यूक्रेन के साथ ऐसा क्या है जिसकी वजह से रूस पूरी दुनिया से भी टकराने को तैयार है. वैसे तो छोटे-बड़े कई कारण हो सकते हैं, लेकिन एक अहम और सबसे बड़ा कारण नाटो है. जी हां, इस युद्ध के पीछे सबसे बड़ी भूमिका नाटो की ही है. आइए आपको बताते हैं विस्तार से.

क्या है NATO:

वर्ष 1939-1945 के बीच चले दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद सोवियत संघ की विस्तारवादी नीति कायम रही. सोवियत संघ को रोकने के लिए अमेरिका ने 1949 में 12 देशों के साथ नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन) को बनाया. धीरे-धीरे इसमें सदस्य बढ़ते गए और आज के समय में नाटो के 30 देश मेंबर हैं. यह एक सैन्य गठबंधन है और इसका उद्देश्य साझा सुरक्षा नीति पर काम करना. अगर कोई देश नाटो के किसी भी सदस्य पर हमला करता है तो नाटो का यह फर्ज होता है कि सभी देश एकजुट होकर उस पर हमला करें या उससे बदला लें.

NATO से रूस के चिढ़ की वजह:

रूस नाटो से क्यों चिढ़ता है, इसे समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा. दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद दुनिया में सोवियत संघ और अमेरिका 2 सुपरवार थे. 25 दिसंबर 1991 को सोवियत संघ से टूटकर 15 नए देश बने. इनमें से अधिकतर देश नाटो में शामिल होते गए. वहीं 2008 में जॉर्जिया और यूक्रेन को भी NATO में शामिल होने का न्योता दिया गया था, लेकिन रूस ने ऐसा नहीं होने दिया. रूस के राष्ट्रपति नाटो के विस्तार को लेकर लगातार आपत्ति जता चुके हैं. पिछले साल दिसंबर में उन्होंने कहा था, कि पूरब में NATO का विस्तार मंजूर नहीं है. अमेरिका हमारे दरवाजे पर मिसाइलों के साथ खड़ा है.

क्या चाहता है रूस:

रूस चाहता है कि नाटो पूर्वी यूरोप में अपना विस्तार फौरन बंद करे. इससे उसे खतरा है. ब्लादिमीर पुतिन कई बार कह चुके हैं कि यूक्रेन का NATO में शामिल होना रूस को किसी कीमत पर मंजूर नहीं है. वो इसकी लिखित गारंटी चाहते हैं कि यूक्रेन नाटो में नहीं जाएगा. रूस ये भी चाहता है कि नाटो रूस के आसपास अपने देशों द्वारा हथियारों की तैनाती बंद करे. 

क्या चाहता है यूक्रेन:

यूक्रेन की सेना काफी छोटी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के पास करीब 8.5 लाख सैनिक हैं तो यूक्रेन के पास महज 2 लाख जवान हैं. दोनों के रक्षा बजट में भी काफी अंतर है. यूक्रेन को रूस से खतरा महसूस होता है, इसलिए वह अपनी आजादी बरकरार रखने के लिए ऐसे सैन्य संगठन की जरूरत महसूस करता है जो उसकी रक्षा कर सके और उसके लिए NATO से बेहतर कोई दूसरा संगठन नहीं हो सकता. क्योंकि उसके आसपास के कई दोस्त पहले से नाटो के सदस्य हैं.

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