12 साल की अशना नकी बनीं लेखिका, परिवार सबसे कम उम्र लेखक, अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ब्री बुक्स ने की पुस्तक प्रकाशित

काशीपुर / उत्तराखंड (रिज़वान अहसन ),,,,काशीपुर की 12 वर्षीय अशना नकी ने महज 8वीं कक्षा में पढ़ते हुए लेखिका बनकर पूरे शहर का नाम रोशन किया है। आर्मी पब्लिक स्कूल हेमपुर की छात्रा अशना की कहानी संग्रह ‘यंग माइंड ग्रेट लेसंस’ को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बाल पुस्तक प्रकाशक ब्री बुक्स ने प्रकाशित किया है। इसके साथ ही अशना अपने परिवार की पांचवीं और सबसे कम आयु की पुस्तक लेखक बन गई हैं।
साहित्यिक परिवार की विरासत को बढ़ाया आगे
अशना नकी का परिवार शिक्षा और लेखन के क्षेत्र में पहले से ही जाना जाता है। उनसे पहले उनके पिता डॉ. नकी उद्दीन की कॉमर्स विषय पर पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। बड़े अंकल नदीम उद्दीन एडवोकेट की 45 से अधिक जन जागरूकता, कानूनी जागरूकता और साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। चाचा डा. जिया उद्दीन की इंजीनियरिंग गणित विषय पर पुस्तकें और बड़ी बहन नीलिमा नदीम एडवोकेट की कानूनी जागरूकता विषय पर पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इस साहित्यिक माहौल में पली-बढ़ी अशना ने भी अब लेखन की दुनिया में कदम रख दिया है।
स्कूल के कार्यक्रम से मिली प्रेरणा
यह पुस्तक आर्मी पब्लिक स्कूल हेमपुर में संचालित विशेष कार्यक्रम का परिणाम है। स्कूल के चेयरमैन ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह की प्रेरणा और प्रिंसिपल डॉ. मालिनी शर्मा के नेतृत्व में छात्रों को युवा लेखक के रूप में सशक्त बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ब्री बुक्स के सहयोग से यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के संयोजक स्कूल के अंग्रेजी लेक्चरर अतुल यादव हैं।
अशना ने इसी कार्यक्रम के तहत अपनी पुस्तक न सिर्फ लिखी है बल्कि खुद डिजाइन भी की है। ‘यंग माइंड ग्रेट लेसंस’ में 10 बाल प्रेरक कहानियां शामिल हैं जो बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं। यह पुस्तक ब्री बुक्स की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
स्कूल से लेकर शहर तक बधाइयों का तांता
अशना की इस उपलब्धि पर स्कूल के चेयरमैन ब्रिगेडियर सुखबीर सिंह, प्रधानाचार्य डॉ. मालिनी शर्मा, कार्यक्रम संयोजक अतुल यादव सहित सभी शिक्षकों, स्टाफ और छात्र-छात्राओं ने खुशी जताई है। शहर के विभिन्न अधिवक्ताओं और पत्रकारों ने भी अशना को बधाई दी है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
डॉ. मालिनी शर्मा ने कहा कि अशना की सफलता स्कूल के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा बनेगी। 12 साल की उम्र में किताब लिखना और प्रकाशित होना बड़ी बात है। यह साबित करता है कि उम्र प्रतिभा की मोहताज नहीं होती।


















