स्योहारा प्रशासन की अनदेखी से राहगीर प्यासे भटकने को मजबूर-शीतल जल का हकदार कौन-सिर्फ कागज़ या आमजन?

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❄️ स्योहारा में शीतल जल प्याऊ बने शोपीस,
प्रशासन की अनदेखी से राहगीर प्यासे भटकने को मजबूर
🗓️ रिपोर्ट: 1 जून 2025 | स्थान: स्योहारा, जिला बिजनौर (उ.प्र.)
भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच जब हर नागरिक को शीतल जल की आवश्यकता है, उस समय स्योहारा नगर पालिका द्वारा स्थापित अधिकांश प्याऊ या तो सूखे पड़े हैं, या उनके शीतल जल यंत्र (फ्रीजर) खराब हैं। नतीजा यह है कि राहगीर व स्थानीय जनता सार्वजनिक जल सुविधाओं के अभाव में परेशान और नाराज़ हैं।
📍 जमीनी हकीकत: ये प्याऊ हैं बेहाल
1️⃣ ठाकुरद्वारा रोड मस्जिद के पास
प्याऊ पूरी तरह सूखा पड़ा है। राहगीर यहां रुकते हैं, लेकिन पानी की एक बूंद नहीं मिलती।
2️⃣ नूरपुर रोड – थाना परिसर (भीतर व बाहर)
पानी आता है, लेकिन शीतल नहीं। फ्रीजर खराब हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि “पिछले साल से मरम्मत नहीं हुई है।”
3️⃣ पीर का बाज़ार (वार्ड 11)
सभासद के घर के सामने लगा प्याऊ दोहरी परेशानी से जूझ रहा है — टंकी से पानी लीक हो रहा है और फ्रीजर भी खराब है। दो वर्षों से बंद पड़ा है।
4️⃣ मोहल्ला मिल्कियान
यहाँ प्याऊ को जड़ से उखाड़ दिया गया है। किसी भी प्रकार की जल सुविधा मौजूद नहीं।
5️⃣ चुंगी और मुरादाबाद मार्ग
चुंगी पर प्याऊ को पूरी तरह हटा दिया गया है। मुरादाबाद रोड पर हाजी इलियास पंप और केनरा बैंक के पास भी प्याऊ निष्क्रिय पड़े हैं।
🚱 हैंडपंप भी बेहाल: 80% से अधिक खराब
सिर्फ प्याऊ ही नहीं, बल्कि शहर के लगभग 80% हैंडपंप भी या तो खराब हैं या दूषित जल दे रहे हैं। यह हालात जल संकट को और भयावह बना रहे हैं।
😠 जनता का आक्रोश: “प्याऊ सिर्फ फोटो के लिए लगते हैं”
स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने नगर पालिका प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि:
“प्याऊ लगवाने के बाद इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हर साल गर्मी में यही हाल होता है। सिर्फ उद्घाटन के फोटो खिंचवाने के लिए लगते हैं ये प्याऊ।”
🧾 प्रशासन का दावा – ज़मीन से उलटा
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी का कहना है:
“शहर में कुल 22 शीतल जल प्याऊ लगे हैं और सभी सुचारु रूप से कार्य कर रहे हैं।”
हालांकि, हमारे संवाददाता द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में अधिकांश प्याऊ खराब या निष्क्रिय पाए गए।
🔍 निष्कर्ष: शीतल जल सुविधा की सच्चाई आईने में
नगर की जल सुविधाएं, खासकर प्याऊ, जिनका उद्देश्य जनता को तपती गर्मी में राहत देना था, आज स्वयं ही राहत की मोहताज हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते इनकी मरम्मत और निगरानी नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह केवल कागज़ों की योजना बनकर रह जाएगी।
📢 जनहित में सवाल:
कब सुध लेगा नगर प्रशासन?
शीतल जल का हकदार कौन — सिर्फ कागज़ या आमजन?
क्या जल सुविधाएं केवल बजट खर्च दिखाने का ज़रिया हैं?
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