सरकार द्वारा गंगा को संरक्षित करने अनेको योजनाओं के बाद भी बाज नही आ रहे खनन माफिया

उत्तराखंड हरिद्वार आईरा न्यूज़ नेटवर्क राजेश सिंघल
सरकार द्वारा गंगा को संरक्षित करने अनेको योजनाओं के बाद भी बाज नही आ रहे खनन माफिया
सुबह से ही खच्चरों से गंगा नदी से रेता निकालने का हो जाता है खेल शुरू
हरिद्वार । पतित पावनी मां गंगा नदी से अवैध खनन का कारोबार बे खौफ चल रहा है जो कि सुबह होते ही घोड़े और खच्चरों से रेता निकालने का खेल शुरू हो जाता है जबकि कुछ दूरी पर ही पुलिस चौकी हैं। जोकि खनन माफियाओं से अवैध उगाई का अड्डा मात्र लग रही है इसके बावजूद ही बे खौफ अवैध खनन का कार्य लगातार चल रहा है।

सप्त सरोवर मार्ग पर स्थित शदाणी घाट के बराबर से ही गंगा नदी सुबह से खच्चर रेता निकालने में लग जाते हैं। जो दिन भर में कई चक्कर लगाते हैं एक खच्चर में एक कुंटल से ऊपर रेट एक दफा में ले आता है इससे अनुमान लगा सकते हैं एक घोड़े ने 20 चक्कर लगाए 20 कुंटल रेत हो गया रेता जिसकी कीमत ₹2000 से ऊपर हो गई अगर 40 खच्चर चल रहे हैं तो आप इसी चीज से अनुमान लगा सकते हैं कमाई का आंकड़ा कहां पहुंचता है। प्रतिदिन का इस प्रकार से अवैध खनन कारोबारी के अड्डो पर इकट्ठा किया जाता है रेत कारोबारी द्वारा रेता कई कुंटल रेता अपने अड्डे पर इकट्ठा कर लेते हैं और फिर धीरे-धीरे उसे आसपास के क्षेत्र में जहां कार्य चल रहा होता है वहां मोटे मुनाफे में बेचा जाता है। पिछले काफी समय से यह अवैध खनन का कारोबार चल रहा है जबकि इन्ही गंगा घाटों पर श्रद्धालु स्नान करने आते हैं लेकिन बिना किसी डर के यह कारोबार धड़ल्ले से चलाया जा रहा है सवाल यह उठता है कि आखिर इतना बड़ा कारोबार किसकी मिलीभगत से चल रहा है क्या प्रशासन को नहीं दिखाई दे रहा है या प्रशासन के संज्ञान में मामला नहीं है क्या प्रशासन को ऐसे खुलेआम अवैध खनन का काम करने वालों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्यवाही नहीं करना चाहिए ताकि राजस्व की हानि को रोका जा सके। जिससे भविष्य में इस तरह का अवैध अवैध खनन माफियाओं पर लगाम लगाई जा सके। जबकि भाजपा सरकार द्वारा गंगा को संरक्षित करने उद्देश्य से नमामि गंगे जैसी अनेक योजनाएं चलाई जारही है जिनको अवैध खनन माफिया चुना लगाने में लगे हुए है।



















