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लिव-इन रिलेशनशिप: भारतीय संस्कृति के विरुद्ध या आधुनिकता का मुखौटा..? – ज्योति कुमारी

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आईरा न्यूज़ नेटवर्क
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लिव-इन रिलेशनशिप: भारतीय संस्कृति के विरुद्ध या आधुनिकता का मुखौटा..? – ज्योति कुमारी

बेंगलुरू – भारतीय समाज में शादी को केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का पवित्र बंधन माना जाता है। ऐसे में लिव-इन रिलेशनशिप जैसे रिश्तों पर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे। सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो बिना शादी के साथ रहने को आज भी सम्मानजनक नहीं माना जाता, और इसे कई लोग प्रॉस्टिट्यूशन जैसी कुरीतियों से जोड़कर देखते हैं।

साल भर पहले का एक मामला इसका उदाहरण है। पूर्णिया की एक इंजीनियर लड़की बैंगलोर में 8 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रही। उस दौरान लड़के और उसके परिवार ने उसका शोषण किया, कमाई का फायदा उठाया। लेकिन जब शादी की बात आई तो युवक ने दूसरी लड़की से शादी कर ली। आज वह पीड़ित लड़की कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगा रही है, समाज में उसकी प्रतिष्ठा भी धूमिल हो चुकी है।

समाज की सच्चाई:

हमारे पुरुषप्रधान समाज में लड़कों के कई रिश्तों के बावजूद उनकी इज्जत बरकरार रहती है, जबकि लड़कियों पर एक रिश्ते के बाद भी उंगली उठाई जाती है।

कोर्ट ने भले लिव-इन रिलेशन को मान्यता दे दी हो, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसे स्वीकार्यता नहीं मिल पाई है।

आंकड़ों के मुताबिक, 99% लिव-इन रिश्ते शादी में नहीं बदलते और 90% मामले कभी न कभी कोर्ट तक पहुंचते हैं।

महिलाओं के लिए सीख:

1️⃣ लिव-इन रिश्तों में जाकर खुद को डोरमैट न बनने दें।
2️⃣ डेटिंग तक सीमित रहना, कम्पैटिबल पार्टनर मिलने पर शादी करना बेहतर विकल्प है।
3️⃣ अपने सम्मान की रक्षा करें क्योंकि “खुद का सम्मान करोगे तो ही कोई दूसरा करेगा।”
4️⃣ मर्यादा में रहने वाले लोग ही समाज में सम्मान पाते हैं।
ज्ञान की बात:
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कानून और समाज की सोच में भारी अंतर है। आधुनिकता की आड़ में ऐसे रिश्ते अक्सर महिलाओं के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं। सही समय पर सही फैसले लेना ही जीवन में मर्यादा और सम्मान बनाए रखने का सर्वोत्तम मार्ग है।

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