मैनपुरी-उत्तरप्रदेश

यदि जीवित नहीं कर सकते तो मारने का अधिकार नहीं

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यदि जीवित नहीं कर सकते तो मारने का अधिकार नहीं

आईरा न्यूज़ नेटवर्क स्टेट ब्यूरो सुबोध कुमार

जनपद मैनपुरी किशनी क्षेत्र के गांव गढ़िया में चल रही साथ दिवसीय बुद्ध कथा का चौथा दिन था बौद्ध कथा वाचक नरेंद्र बौद्ध ने बुद्ध की कथा का मनोरम वर्णन किया कथा में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और बुद्ध कथा को सुनकर मंत्र मुक्त हो गए कथावाचक ने कहा कि श्रावस्ती नगर में मणभद्र आचार्य सभी बच्चों को शिक्षा देते थे जिसमें से एक बालक माण्विक नाम का राजकुमार पढ़ने में बहुत निपुण था और अहिंसक था जो कि बाद में अंगुलिमाल के नाम से जाना जाता है ।उसे आचार्य ने कक्षा का मॉनीटर माना । इस कक्ष में एक शरारती बालक और एक शरारती बालिका थी दोनों छात्रों को परेशान करते थे जिसके चलते सभी छात्र एकजुट होकर उन्हें मारने की प्लान बनाते हैं सभी छात्र झूठ बोलते हुए उसे कहते हैं कि उसे गुरु माता बुला रही हैं और उस पर गलत दोसा रोपण लगाते हैं जिससे गुरु आचार्य मणभद्र नाराज हो जाते हैं और आचार्य मणभद्र सोचते हैं कि इस कृत्य कार्य का बदला कैसे लिया जाए ।उनके मन में एक विचार आया कि क्यों ना इससे गुरु दक्षिणा मांग लें तो उन्होंने छुट्टी के बाद अहिंसक को अकेला पाठशाला में रखा और उसे गुरु दक्षिणा मांगी है तुम कक्षा में सबसे अच्छे नंबरों से पास हुए हो इसलिए मैं तुमसे गुरु दक्षिणा मांग रहा हूं ।अहिंसक बोला आचार्य आप मांगे मैं देने को तैयार हूं आचार्य ने अहिंसक से 1000 मानव का वध करने की गुरु दक्षिणा मांगी उसने विचार किया अगर मैं अपने आचार्य की गुरु दक्षिण नहीं दे पाए तो आचार्य का बहुत बड़ा अपमान होगा आचार्य जी में गुरु दक्षिणा देने को तैयार हूं। और अपनी कटारी को लेकर गुरु माता के पास जाता है और कहता है की गुरु माता आप मुझे आशीर्वाद दें मैं अपने आचार्य की गुरु दक्षिणा को पूरी करने जाता हूं ।जो मुझे 1000 मानवों का वध करना है माता बहुत समझती है लेकिन वह नहीं मानता और जंगल में चला जाता है नरसंहार करने लगता है ।उसने 1000 मानव का वध करने के बाद वापस अचार के पास आया और आचार से बोला कि मैं आपके आदेश का पालन करते हुए 1000 लोगों का वध कर आया। आचार्य ने कहा कि मुझे कैसे मालूम अपने 1000 लोगों का वध किया है इसका मुझे प्रमाण चाहिए । तो वह पुनः जंगल में लौट जाता है ।और मानवों की हत्या करके उनकी एक उंगली काटकर अपने गले की माला में पहन लेता है 999 लोगों की हत्या करने के बाद अचानक उसके सामने साधु के रूप में तथागत गौतम बुद्ध आते हैं। और उन्हें मरने के लिए आगे बढ़ता है साधु से कहता है आपको मुझसे डर नहीं लगता है आप आगे बढ़ते चले जा रहे हैं तथागत बुद्ध ने कहा आप मुझे मारना चाहते हो मार दो लेकिन मेरी एक शर्त मानो डाकू बोला बताओ क्या शर्त है बुद्ध ने कहा इस पेड़ से एक पत्ती तोड़कर मुझे दो तो उसने एक पति की जगह पूरी डाली काट के दे दी इस पर तथागत बुद्ध जी बोले हे अंगुलिमाल इसे जोड़ दो लेकिन वह उसे जोड़ नहीं पाया इसके बाद बुद्ध ने कहा जिस तरह इस डाली को तुम काट कर जोड़ नहीं सकते हो इस तरह इंसानों को मार कर तुम जीवन नहीं दे सकते हो उसकी समझ में आ गया और बोला साधु आप मुझे अपनी शरण में ले लीजिए इस तरह डाकू अंगुलिमाल भगवान बुद्ध की शरण में पहुंच गया वहीं कथा के समापन पर आयोजकों ने युवा बौद्ध सम्राट अशोक सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुज प्रताप शाक्य का फूल मालाओं से स्वागत किया और बाद में प्रसाद वितरण करके कथा के दिन समापन किया गया
अबनीश शाक्य क्षेत्र पंचायत सदस्य राहुल शाक्य प्रेम नारायण शाक्य मुकेश शाक्य
विमल शाक्य शास्त्री नरेंद्र बौद्ध शास्त्री सुनीक्षा बौद्ध समस्त ग्राम बाशी उपस्थित रहे

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