माही क्लासेस में फ़ातिमा शेख़ की जयंती मनाई गई।

आईरा न्यूज़ नेटवर्क : स्टेट हेड
राँची : इराकी उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल में जमैतुल इराकीन के सहयोग से चलाए जा रहे माही क्लासेस में आज आधुनिक भारत की पहली सहायक शिक्षिका फ़ातिमा शेख़ जिन्होंने समाज के सबसे दबे कुचले लोगों और खासकर स्त्रियों की तालीम के लिए सावित्रीबाई फुले के साथ कंधे से कंधार मिलकर काम की, जिनकी जयंती मनायी गयी। अगरतलाप है कि फातिमा शेख ने तकरीबन 175 साल पहले समाज के दबे कुछ लोगों की बेहतर तालीम के लिए सबसे मजबूत सहयोगी और साथी शिक्षिका के रूप में जानी जाती है।
इस शुभ अवसर पर माही क्लासेस द्वारा चलाया जा रहे प्री-बोर्ड मॉक टेस्ट 2024 में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को पुरूष्कार देकर सम्मानित किया गया जिसमें प्रथम श्रेणी के लिए दिव्या कुमारी,द्वितीय श्रेणी के लिए ज़िकरा नसीम एवं तृतीय श्रेणी के लिए सानिया परवीन को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि शिक्षाविद अब्दुल्लाह कैफ़ी ने कहा कि आज हम जिस शख्शियत को याद करने के लिए जमा हुए है उसकी वजह क्या है? उन्होंने मुश्किल माहौल में शिक्षा के चिराग़ को जलाए रखा जब तालीम आम जन के लिए नहीं हुआ करती थी। फातिमा शेख, सावित्रीबाई फुले के मिशन की सबसे मजबूत सहयोगी और साथी शिक्षिका थी। फातिमा शेख का जन्म 9 जनवरी 1831 पुणे महाराष्ट्र में हुआ था। फ़ातिमा शेख एक भारतीय शिक्षिका थी, जो सामाजिक सुधारकों, ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की सहयोगी थी। फ़ातिमा शेख़, मियां उस्मान शेख की बहन थी, जिनके घर में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने निवास किया था जब फुले के पिता ने दलितों और महिलाओं के उत्थान के लिए किए जा रहे उनके कामों की वजह से उनके परिवार को घर से निकाल दिया था। वह आधुनिक भारत में सबसे पहली मुस्लिम महिला शिक्षकों में से एक थी और उन्होंने स्कूल में दलित बच्चों को शिक्षित करना शुरू किया। ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख के साथ, दलित समुदायों में शिक्षा फैलाने का कार्य किया
फ़ातिमा शेख़ और सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं और उत्पीड़ित जातियों के लोगों को शिक्षा देना शुरू किया।


















