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मानवाधिकार आयोग में गूंजा मेरठ के 13 वर्षीय छात्र की मौत का मामला-डॉ.तारिक ज़की की पहल पर प्रशासन पर शिकंजा कसने की तैयारी, DM व नगर पालिका से जवाब तलब होने की संभावना

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मानवाधिकार आयोग में गूंजा मेरठ के 13 वर्षीय छात्र की मौत का मामला
डॉ. तारिक ज़की की पहल पर प्रशासन पर शिकंजा कसने की तैयारी, DM व नगर पालिका से जवाब तलब होने की संभावना

लखनऊ / मेरठ।
मेरठ के हस्तिनापुर में आवारा सांड के हमले से 13 वर्षीय छात्र की दर्दनाक मौत का मामला अब राज्य स्तर पर गूंजने लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता और वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. तारिक ज़की की पहल पर यह गंभीर मामला उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए इसे डायरी नंबर 1843/IN/2026 के रूप में दर्ज कर लिया है।

सूत्रों के अनुसार, आयोग अब इस मामले में मेरठ के जिलाधिकारी, नगर पालिका परिषद और पशुपालन विभाग से जवाब तलब कर सकता है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में लंबे समय से आवारा पशुओं का आतंक है और स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसी लापरवाही का खामियाजा एक मासूम छात्र को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

डॉ. तारिक ज़की ने मानवाधिकार आयोग को भेजी अपनी शिकायत में कहा है कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और सरकारी तंत्र की विफलता का परिणाम है। उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट कहा है कि यदि समय रहते प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता तो एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।

उन्होंने आयोग से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जाए और पीड़ित परिवार को ₹5,00,000 का मुआवजा दिलाया जाए। साथ ही जिले में आवारा पशुओं को नियंत्रित करने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। यदि प्रशासन की लापरवाही के कारण किसी नागरिक की जान जाती है तो यह सीधे-सीधे नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

अब सभी की निगाहें राज्य मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आयोग इस मामले में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांग सकता है और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकता है।

यह मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं और स्थानीय लोगों में गहरा रोष देखा जा रहा है।

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