नई दिल्ली

मणिपुर की घटना पर INDIA एकजुट, दवाब में NDA सरकार

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मणिपुर की घटना पर INDIA एकजुट, दवाब में NDA सरकार
रितेश सिन्हा

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
मणिपुर में दो महिलाओं को निवस्त्र पर परेड कराने व उनके निजी अंगों के साथ छेड़छाड़ वाले वीडियो के सामने आने के साथ पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा देश की आम जनता में भी भारी आक्रोश है। सदन से सड़क तक निंदाओं का दौर जारी है। मणिपुर के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह वीडियो दो महीने पूर्व 4 मई का बताया जा रहा है। मणिपुर में 3 मई को मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हिंसा की शुरूआत हुई थी। दरअसल इसके पीछे मणिपुर में मैतेई समाज की एक बहुत पुरानी मांग कि उसको कुकी समाज की तरह ही शेड्यूल ट्राइव अनुसूचित जनजातीय का दर्जा दिया जाए। इस पर उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मुरलीधरन ने 4 सप्ताह में इस पर जवाब मांगा था। मैतेई समाज की इस बड़ी पुरानी मांग को लेकर अनुसूचित जनजातीय आयोग भी काफी गंभीर था। आयोग के अध्यक्ष हर्ष चौहान का मानना था कि ये मांग जायज थी और दोनों की परिस्थितियों में कोई अंतर नहीं था। यही विवाद का कारण बना जिसमें अनुसूचित जनजातीय आयोग के अध्यक्ष ने एक महीने पहले ही इस्तीफा केंद्र सरकार को सौंप दिया।
मणिपुर भारत के पूर्वात्तर में स्थित राज्य है। उत्तरपूर्व के इन राज्यों को सेवन सिस्टर भी कहा जाता है। मणिपुर की सीमा म्यांमार से लगती है। लगभग 35 लाख लोगों की आबादी है। इसमें मैतेई जाति लगभग आधे की हिस्सेदारी रखती है और 43 फीसदी कुकी और नगा समुदाय का हिस्सा है जिन्हें अल्पसंख्यक और बाकी में जनजाति हैं। इन दोनों समुदायों के बीच मई के शुरूआत से हिंसक झड़पें हुई जिसमें 150 से अधिक लोग मारे गए और 500 से अधिक लोग चोटिल हुए हैं। हिंसा को रोकने और शांति स्थापित करने के लिए सेना के जवानों, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के जवानों को इस संघर्ष के कारण 60000 से अधिक लोगों को विस्थापित करना पड़ा है। इन झड़पों में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच भारी तोड़फोड़ हुई है। स्थानीय पुलिस के हथियार भी छीने गए हैं। इन हिंसक झड़पों के कारण सैकड़ों चर्च और डेढ़ दर्जन मंदिरों को भी नुकसान पहुंचा है और कई गांव आगजनी के शिकार हुए हैं।
इस घटना की शुरूआत में मैतेई समुदाय को जनजातीय दर्जा देने का कुकी और नगा समुदाय से विरोध करना शुरू किया। उनका मानना है कि मैतेई समुदाय का स्थानीय स्तर पर प्रभाव अधिक मजबूत हो जाएगा जिससे वे कुकी बाहुल्य पहाड़ी क्षेत्रों में जमीने खरीदकर वहां उनका सामाजिक संतुलन बिगाड़ देंगे। मैतेई समुदाय द्वारा कुकियों को नशीली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के माध्यम से उनके समुदाय को तितर-बितर करना महज एक बहाना था। म्यांमार के रास्ते अवैध घुसपैठ ने इस तनाव को बढ़ाने में अपनी भूमिका बढ़ाई है। मैतेई, नगा और कुकी समुदायों का यह संघर्ष दशकों पुराना है और इनके धार्मिक व स्थानीय होने के मुद्दे पर ये एक-दूसरे से आपस में पहले भी भिड़ते रहे हैं। सुरक्षा बलों पर हमले का कोई मौका नहीं चूकते रहे हैं। इस बार का सत्ता संघर्ष धार्मिक न होकर जातीयता पर आधारित हो चुका है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ विपक्षी गठबंधन सरकार पर हमलावर है। मणिपुर की घटनाओं पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अलग-अलग ट्वीट कर इस दिल दहलाने वाली घटना की पुरजोर भर्त्सना की। विपक्ष ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल करते हुए कि प्रधानमंत्री ऐसी हिंसक घटनाओं पर मौन क्यों धारण किए हुए हैं। आम आदमी को विचलित करने वाली इन तस्वीरों और वीडियो के वायरल होने के बाद पीएम मोदी की खामोशी समझ से परे है। कांगपोक्सी जिले में हुई इस घटना ने संपूर्ण विपक्ष को केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ हमलावर होने का एक बड़ा मौका दे दिया है। हालांकि इस मामले की पुलिस जांच की जा रही है, कुछ गिरफ्तारियां भी की गई है, लेकिन महिलाओं के लिए छिटपुट घटना पर संज्ञान लेने वाले महिला आयोग की खामोशी समझ से परे है। वहीं अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष के विरोध स्वरूप इस्तीफे के बाद आयोग महज 1 सदस्य के साथ अपना काम चला रहा है। आयोग इस मामले को लेकर बड़ी कार्रवाही के मूड में था, मगर गृहमंत्री और इनके अधिकारियों के साथ कड़े मतभेद की वजह से इसके अध्यक्ष ने अपना इस्तीफा सौंप दिया।
संसद का सत्र शुरू होने के बाद से इस घटना को लेकर दोनों सदनों में हंगामा हो रहा है। बिना किसी सार्थक बहस के सदन को रोज स्थगित किया जा रहा है। मानसून सत्र में सरकार से उम्मीद थी कि कई बिल पेश किया जाएगा। कांग्रेस भी यूसीसी को लेकर सरकार से आर-पार के मूड में थी, लेकिन मणिपुर की घटना ने इन सभी मुद्दों को पीछे छोड़ दिया। मणिपुर के मुद्दे पर विपक्ष अब बड़ी बहस चाहता है। सरकार बार-बार कह रही है कि हम बहस को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष पहले इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री का आधिकारिक बयान चाहता है, जिसके बाद इस पर चर्चा के लिए तैयार दिखता है। तीन दिनों से वहीं पर सुई अटकी हुई है। मामला इंडिया वर्सेज एनडीए के बीच अटक कर रह गया है।
हालांकि लोकसभ अध्यक्ष ओम बिरला, गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सदन में चर्चा के लिए विपक्ष से अनुरोध कर रहे हैं, मगर विपक्ष प्रधानमंत्री के भाषण पर अटका हुआ है। राज्यसभा में इस मुद्दे पर हंगामा जारी है। आप के नेता संजय सिंह को पूरे सत्र के लिए निलंबित किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता विशाल तिवारी ने याचिका दायर की है। इससे पूर्व सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है और अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। सत्ता पक्ष भी राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के हिंसा पर भी सदन बहस चाहता है। इनमें से दो राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं।
लगभग दो महीने से जल रहा मणिपुर राजनीति का केंद्र बन चुका है। ये जातीय संघर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरे के संकेत हैं। हालांकि सरकार ने शांति के लिए 4 जून को आयोग का गठन किया था। इस आयोग के अध्यक्ष गुवाहाटी हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय लांबा कर रहे हैं। 10 जून को राज्यपाल अनुसुईया उइके ने अलग-अलग समुदाय से बातचीत के लिए पहल की थी। सरकार की पूरी कोशिश है कि इस समस्या का समाधान निकाला जाए। राष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के पास ऐसी सूचना है कि सीमा प्रदेश होने के कारण अन्य देशों के भी लोग इस मामले को हवा दे रहे हैं ताकि अस्थिरता का माहौल बरकरार रहे। केंद्र सरकार इसको लेकर काफी गंभीर है। विपक्ष को संयम बरतना चाहिए और सरकार के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। पक्ष और विपक्ष मिल-जुलकर दोनों सदनों में हो रहे हंगामे को रोके और एक-दूसरे को विश्वास में लेकर इस ज्वलंत समस्या के शीघ्र समाधान के लिए ठोस कदम उठाए।

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