बरसाती पानी के संरक्षण के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई व मरम्मत का कार्य मिशन मोड में करें पूरा : उपायुक्त अनीश यादव।

सुमरिन योगी
करनाल (हरियाणा)
बरसाती पानी के संरक्षण के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई व मरम्मत का कार्य मिशन मोड में करें पूरा : उपायुक्त अनीश यादव।
उपायुक्त ने जल संरक्षण को लेकर अधिकारियों के साथ की बैठक, दिए आवश्यक निर्देश।
करनाल 1 जुलाई, उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, ऐसे में बरसाती पानी को बचाना बहुत जरूरी है। इसके लिए जिला में स्थापित किए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की साफ-सफाई के कार्य को मिशन मोड में पूरा करें, कहीं पर भी लापरवाही न बरतें। जल संरक्षण और कैच द रेन यानि बरसाती पानी को बचाने की मुहिम राष्ट्रीय हित का महत्वपूर्ण विषय है, इसे जन आंदोलन बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल शक्ति मिशन के तहत सभी अधिकारी अपने-अपने विभाग से संबंधी कार्य को निर्धारित समयावधि में पूरा करें और अपने विभाग की गतिविधियों एवं उपलब्धियों को राष्ट्रीय जल मिशन पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें।
उपायुक्त शुक्रवार को लघु सचिवालय के सभागार में जल शक्ति मिशन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जल शक्ति मिशन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी योजना है, सभी अधिकारी इस मिशन के तहत किए जाने वाले कार्यों को गंभीरता से पूरा करवाएं और जल संरक्षण में अपना भरपूर सहयोग दें। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य को लेकर अभियान चलाया गया है, उसमें आशातीत सफलता मिल रही है, लेकिन इसमें और कार्य करना अभी बाकी है। यह कार्यक्रम मानसून सीजन में विशेष महत्व का है, आगामी 30 नवम्बर तक देशभर में अनेक स्थानों पर बारिश होती है। बरसात का पानी नालियों, नहरों व नदियों से होकर सागर-महासागरों में व्यर्थ चला जाता है।
उपायुक्त ने कहा कि जहां नए रेन वाटर हार्वेस्टर की आवश्यकता है, वहां बनवाए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जो परम्परागत वॉटर बॉडी व टैंक हैं उनका पुर्निर्माण किया जाए। इसी प्रकार गांवों में उपलब्ध परम्परागत जोहड़ों को टेक-अप कर उनमें सफाई व पौधारोपण कर सौन्दर्यीकरण किया जाए। इसके अतिरिक्त हर गांव में स्कूलों के साथ-साथ सरकारी भवनों में सोख्ते गड्ढे बनवाए जाएं। इसके लिए उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में पंचायत विभाग द्वारा सोख्ते गड्ढों की संख्या और बढ़ाई जाए। इसके अलावा स्कूलों व आंगनवाड़ी केन्द्रों में भी सोख्ते गड्ढे स्थापित करवाए जाएं। उन्होंने कहा कि नहर व पास लगती पंचायती भूमि में बरसाती पानी के संरक्षण के लिए तालाब बनाने की व्यवस्था की जाए ताकि जरूरत के समय बरसाती पानी को सिंचाई के कार्य में उपयोग लाया जा सके। मीटिंग में डीडीपीओ राजबीर खुंडिया ने बताया कि जिले में करीब 308 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए गए हैं, जिनकी साफ-सफाई व मरम्मत का कार्य जारी है।
बैठक में सीईओ जिला परिषद गौरव कुमार, नगर निगम के ईओ देवेन्द्र नरवाल, पंचायती राज के कार्यकारी अभियंता परविन्द्र सैनी उपस्थित रहे।




























