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फसल अवशेषों को जलाने पर की जा रही है कार्रवाई, किसानों से अपील पराली प्रबंधन के लिए आये आगे, दी जा रही है प्रोत्साहन राशि : उपायुक्त अनीश यादव

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आईरा न्यूज़ नेटवर्क करनाल सेसुमरिन योगी

जिला में 702 कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से किसानों के लिए उपलब्ध है आधुनिक कृषि यंत्र

करनाल । उपायुक्त अनीश यादव ने कहा कि जिला प्रशासन फसल अवशेष जलाने को लेकर सख्त है। सेटेलाईट के माध्यम से जिला प्रशासन को 20 विभिन्न स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की सूचना प्राप्त हुई थी, इन सभी लोकेशन की पहचान कर ली गई है तथा 18 लोकेशन पर फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है। इनमें से 4 के खिलाफ कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है तथा अन्य 14 पर 35 हजार रूपये जुर्माना भी लगाया गया है और संबंधित ग्राम सचिव, पटवारी और नम्बरदार को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। उपायुक्त ने बताया कि फसल अवशेष ना जलाने के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा आदेश जारी करते हुए धारा 144 भी लागू की गई थी। उपायुक्त ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि जिला में फसल अवशेषों को न जलाया जाए, इसके लिए जिलास्तर, उपमण्डल स्तर, खंड तथा ग्राम स्तर पर निगारानी कमेटियां भी गठित की गई है। इस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। अत: किसानों को फसलों के अवशेष नहीं जलाने चाहिए। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से कृषि यंत्र उपलब्ध करवाएं जा रहे है, जिनकी सहायता से बेहतरीन प्रबंधन किया जा सकता है तथा अवशेषों से खाद भी तैयार की जा सकती है। उपायुक्त ने बताया कि जिला में 702 कस्टम हायरिंग सेंटर बनाए गए है। इन कस्टम हायरिंग सेंटर पर किसानों के समूहों के पास फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, हैपी सीडर, पैडी स्ट्रा चोपर श्रेडर/मल्चर, शर्ब मास्टर, रिवरसीबल एम बी प्लो, रोटरी स्लेशर, जीरों टिल ड्रिल मशीन तथा रोटावेटर जैसे सभी आधुनिक कृषि यंत्र मौजूद है, जोकि इन किसान समूहों को सरकार द्वारा 80 प्रतिशत तक अनुदान देते हुए उपलब्ध करवाएं गए है। यही नहीं जिला में लगभग 250 बेलर भी उपलब्ध है, जिनके माध्यम से बेहतर पराली प्रबंधन किया जा सकता है। जल्द ही इनकी संख्या जिला में 1 हजार तक हो जाएगी। उपायुक्त ने यह भी बताया कि जिला में बड़ी संख्या में किसानों को इस बारे में जागरूक किया गया है। इसी के फलस्वरूप अब तक लगभग 15 से 16 हजार एकड़ भूमि में फसल अवशेष प्रबंधन करते हुए किसानों ने पराली की गांठे बनाई है। यही नहीं पराली प्रबंधन करने वाले किसान को सरकार की ओर से 1 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस योजना के तहत जिला में 4 करोड़ 36 लाख रूपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की जा चुकी है। उपायुक्त ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने करनाल में पराली खरीदने के लिए 3 यार्ड बनाए हैं, पंचायत विभाग ने आईओसीएल को गांव बम्बरेहड़ी, गगसीना और सिरसी में करीब 58 एकड़ जमीन उपलब्ध करवाई है। आईओसीएल 180 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पराली की खरीद करेगा और निर्धारित समय में किसान को भुगतान करेगा। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष जलाना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। फसल अवशेष जलाने से स्वास्थ्य हानि के साथ -साथ किसानों को आर्थिक नुकसान भी होता है। इस नुकसान से बचने के लिए किसानों को पराली जलाना बंद करना होगा तथा किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें, इसके लिए हरियाणा सरकार द्वारा किसानों की हर सम्भव मदद की जा रही है। उपायुक्त ने कहा कि फसलों के अवशेष जलाने से पर्यावरण भी बुरी तरह से दूषित होता है। जबकि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण की जरूरत है। इसके लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है। एकजुटता के साथ हमें इस दिशा में प्रयास करने होंगे। इसमें किसान फसलों के अवशेष जलाने की बजाय उचित प्रबंधन करके बेहतरीन सहयोग दे सकते हैं। अवशेष जलाने से श्वांस के रोगियों के लिए भी अत्यधिक परेशानियां उत्पन्न होती है।
उन्होंनेे कहा कि खरीफ फसलों के लिए किसानों को फसलों के अवशेषों के उचित प्रबंधन की ओर कदम बढ़ाना चाहिए। किंतु बहुत से किसान अवशेषों को जलाते हैं जो कि उचित नहीं है। फसल अवशेषों को जलाने से कोई लाभ नहीं मिलेगा। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। उपजाऊपन कम होने से पैदावार भी कम होती है। साथ ही भूमि में किसानों के मित्र कीट भी खत्म होते हैं। इसलिए किसानों को फसलों के अवशेष नहीं जलाने चाहिए।

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