जी-20 शिखर सम्मेलन : मोदी का विश्व को संदेश, इंडिया गठबंधन की गांठें ढीली पड़ी

जी-20 शिखर सम्मेलन : मोदी का विश्व को संदेश, इंडिया गठबंधन की गांठें ढीली पड़ी
200 घंटे की परिचर्चा के बाद आम सहमति तक पहुंचा जी-20 का घोषणा पत्र
रितेश सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक)
अफ्रीकी संघ का जी 20 में शामिल होना भारत की राजनयिक जीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाप्त हुए जी 20 के शिखर सम्मेलन में समान विचारधारा के अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुए सम्मेलन में अफ्रीकी संघ का शामिल होना एक महत्वपूर्ण कदम है। विश्व के हित में एक सामूहिक प्रयास की जरूरत को भारत ने रेखांकित किया। केन्या के राष्ट्रपति विलियम सामुई रूटो को जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफ्रीकी संघ का जी 20 में शामिल होना एक सकारात्मक कदम है और हम जी 20 में शामिल देशों के संयुक्त प्रयासों को लेकर आशान्वित है, आगे विश्व को काफी उम्मीदें हैं। ये पूरी दुनिया के हित में है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मीडियाकर्मियों का जताया आभार
जी 20 के सफल आयोजन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को धन्यवाद कहा। भारत मंडपम में बने इस अंतर्राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में प्रधानमंत्री पहुंचे और वहां उपस्थित सभी मीडियाकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हाथ हिलाकर सभी का अभिवादन भी किया। चौकाने वाली बात यह रही कि प्रधानमंत्री मोदी जब वहां पहुंचे तो उनकी मौजूदगी में मीडिया सेंटर में भारत मां की जय के नारे भी लगाए गए।
भारत के बाद ब्राजील के नेतृत्व में होगी जी 20 की अगली बैठक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी 20 की अध्यक्षता में ब्राजील के राष्ट्रपति लुई इनासियो लूला डीसिल्वा को सर्वसम्मति के साथ जी 20 की अगली बैठक के लिए अध्यक्षता का एक पारंपरिक गैबल-एक प्रकार का हथौड़ा सौंपा, साथ ही ये भी कहा कि ब्राजील को भारत पूरा सहयोग देगा और जी 20 के हमारे लक्ष्यों को और आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने ब्राजील के राष्ट्रपति को शुभकामनाएं भी दी। भारत के पास अभी नवंबर तक जी 20 की अध्यक्षता को निभाने की जिम्मेदारी है जिसमें अभी भी ढाई महीने बाकी हैं। इन ढाई महीनों में यानी नवंबर के अंतिम पखवाड़े में एक वर्चुअल मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। उस सत्र के दौरान इस बैठक में जो सुझाव और प्रस्ताव आए हैं, उनमें कैसे गति लाई जाएगी और समीक्षा की करने की योजना है। ब्राजील एक दिसंबर को आधिकारिक रूप से जी 20 के अध्यक्ष का कार्यभार संभालेगा। ब्राजील के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को इस सफल आयोजन की बधाई दी और उभरती अर्थव्यवस्था के हितों से जुड़े मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के उठाने का आभार भी जताया।
शिखर सम्मेलन जी-20 का घोषणा पत्र की आम सहमति तक पहुंचाना भारतीय राजनयिकों की मेहनत की सफलता का सही पैमाना माना जा सकता है। इसके लिए 200 घंटे से अधिक लगातार बैठकों का दौर चला, साथ ही उन्होंने यूक्रेन युद्ध और जलवायु परिवर्तन पर आम सहमति बनाने के लिए लंबे दौर के वार्ता को अंजाम दिया। भारतीय राजनयिकों की शानदार टीम वर्क व संयुक्त प्रयासों को पेश करते हुए कूटनीति का एक बेहतर व विशिष्ट उदाहरण पेश किया। इसके लिए भारतीय राजनयिकों ने 300 से अधिक द्विपक्षीय बैठक की और उसमें 15 मसौदे पेश किए। उसके बाद ये संभव हो पाया। इसमें विदेश सेवा के संयुक्त सचिव स्तर दो प्रतिभाशाली अधिकारी इनम गंभीर और नागराज नायडू की मेहनत रंग लाई। ब्राजील, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ वार्ताओं के कई दौर चले और विवादास्पद मुद्दों पर जी 20 देशों के बीच भारत आम सहमति बनाने में कामयाब रहा।
जी 20 शिखर सम्मेलन में विश्व भर के नेताओं ने बैठक के आखिरी दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत को एक मत से स्वीकार किया और इस कृत्रिम बुद्धिमता से मानव की क्षमताओं पर चर्चा की। सभी देश इसके पक्ष में नजर आए और इससे होने वाले नुकसान और आने वाली वैश्विक चुनौतियों पर गंभीर विचार-विमर्श किया। इसके फायदों में कैंसर जैसी बीमारियों से लेकर रेडियोलॉजी की रिपोर्ट में इसकी उपयोगिता का इस्तेमाल हो रहा है। इसके द्वारा छात्र अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। एआई सेंसर पानी, उर्वरक एवं कीटनाशकों की सही जानकारी उपलब्ध कराने में कारगर है। एआई लेन-देन में होने वाले फर्जीवाड़े से हुए वित्तीय लेन-देन की जांच में भी उपयोगी है। एआईसी संचालित चैट बॉक्स कस्टमर केयर में इसका भरपूर इस्तेमाल हो रहा है। जहां इसके फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। चूंकि पूरा सिस्टम डाटा पर निर्भर है जो इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले की निजी जानकारियां भी साझी हो जाती हैं।
नई दिल्ली। जी 20 के अध्यक्ष के तौर पर भारत ने दुनिया को एकता और शांति का संदेश देने में कामयाब रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं वर्तमान से व्यवस्था के मुताबिक होनी चाहिए। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जी 20 शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन किया। भारत की जी 20 समूह की अध्यक्षता ने अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। भारत के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय मसलों को लेकर दिल्ली घोषणा पत्र को लेकर आम सहमति बनाना, दुनिया में आपसी विश्वास की कमी को दूर करते हुए एक मील का पत्थर साबित हुआ। यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक मसलों को लेकर आम सहमति बनवाना और उन देशों के मतभेदों को दूर करते हुए एक दूसरे को करीब लाने का सार्थक प्रयास करते हुए दिल्ली घोषणा पत्र जारी किया गया।
भारत ने विश्व के नेताओं के बीच मतभेद दूर करने के साथ-साथ कूटनीतिक क्षमता को भी प्रदर्शित किया और विश्व स्तर अपनी धाक जमाई। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इस बात को स्वीकार किया कि भारत के नेतृत्व में हुए जी 20 सम्मेलन ने यह साबित कर दिया कि यह अंतर्राष्ट्रीय समूह विश्व स्तर पर उभरे अहम मुद्दों को भी सुलझा सकता है और उसका समाधान निकाल सकता है। शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए जो बाइडन ने अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ महात्मा गांधी के समाधि स्थल पर पहुंच कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे से निबटने की दुनिया की मदद करने के मकसद से अंतराष्ट्रीय स्तर पर बने ग्रीन क्लाइमेट फंड के लिए 2 अरब अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की। सुनक ने भी जी 20 के नेताओं को संबोधित किया और कहा कि दुनिया के कमजोर लोगों की मदद करके वे जलवायु के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के दिशाओं में कार्यरत हैं और जी 20 देशों से उम्मीद करते हैं कि इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। ब्रिटेन दुनिया को समृद्ध और सुरक्षित बनाने के लिए अपना उदाहरण पेश करता रहेगा। हरित जलवायु कोष की स्थापना 194 देशों ने कोपेहेगन समझौते के बाद मिलकर की थी। ये जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को अनुकूल ढालने में विकासशील देशों की मदद करने के लिए बनाया गया सबसे बड़ा वैश्विक कोष है। भारत कई बार विभिन्न मंचों के माध्यम से विकसित देशों से इस संबंध में अपील करता रहा है। दिसंबर में सीओपी 28 की एक शिखर सम्मेलन से पहले इसके आह्वान किया ताकि कमजोर देशों को मदद की जा सके। हालांकि इस जी 20 के सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग नहीं पहुंचे, लेकिन चीनी प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री ली क्विंग के नेतृत्व में मौजूद था।
देश की राजनीति में मोदी एक सकारात्मक संदेश देने में कामयाब रहे। इससे पहले 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने निर्गुट देशों का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कर चुकी है जिसमें 100 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भागीदारी की थी। हालांकि जी 20 के सफल आयोजन में विपक्ष अपनी भूमिका का निर्वहन करने में नाकाम रहा। विपक्ष केवल विरोध की राजनीति में नक्कारखाने में तूती बजाता रहा। जी 20 को लेकर विपक्षी गठबंधन इंडिया लगभग बंट गया है। भाजपा विरोधी नेताओं ने मोदी की अगुवाई में जी 20 को सराहा।
कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य व सांसद शशि थरूर ने जी20 समिट में भारत की अध्यक्षता की खुलकर तारीफ की और कहा कि जो कोई नहीं कर सका वो भारत ने कर दिखाया है। थरूर ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा पत्र पर सभी देशों की आम सहमति बनाना बड़ी बात है। वहीं कांग्रेस के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भोजन में शामिल होने खफा हैं। अधीर ने यहां तक कहा कि अगर ममता इस भोज में शामिल नहीं जाती तो आसमान नहीं टूट पड़ता और न ही कुरान अपवित्र हो जाती। इस पर टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि अधीर को सरकारी प्रोटोकॉल के बारे टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। इंडिया गठबंधन के कई नेता जी 20 के भोज में उपस्थित रहे। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह सुक्खू भी मौजूद रहे। राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात को लेकर है कि भाजपा इसका किस प्रकार लाभ उठाएगी, चुनाव में कैसे भुनाएगी, ये आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनावों में दिखाई देगा, साथ ही विपक्ष इस मुद्दे का कोई लाभ ले पाएगा, इसमें संदेह है।


















