कब और कैसे हुई थी संगीत दिवस मनाने की शुरुआत?
Bijnor-Rajesh singhal

नहटौर। विश्व संगीत दिवस के अवसर पर संगीत शिक्षिका उपाधि अग्रवाल ने बताया कि संगीत का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। संगीत ऐसा है जो हमें आत्मिक और मानसिक शांति की अनुभूति कराता है। हमें खुश रखने के लिए संगीत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दिन को सेलिब्रेट करने का मतलब सिर्फ इतना है कि लोगों को संगीत के महत्व के बारे में जानकारी हो और वो इससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुड़ें।
कब और कैसे हुई थी संगीत दिवस मनाने की शुरुआत?
विश्व संगीत दिवस मनाने की शुरुआत 21 जून 1982 में फ्रांस में हुई थी और इसका श्रेय तत्कालीन सांस्कृतिक मंत्री जैक लैंग को दिया जाता है। फ्रांस के लोगों की संगीत के प्रति दीवानगी को देखते हुए उन्होंने इस दिवस की घोषणा की थी।
उपाधि अग्रवाल ने कहा गीत कोई भी हो, हम हर परिस्थिति में खुद को उससे जोड़ लेते हैं, जैसे यदि कोई प्रेम संगीत हो तो उसे सुनकर हम अपने प्रिय को याद कर उसी भाव में खो जाते हैं। या फिर कोई इमोशनल गाना सुनते समय हम भी उन्हीं भावनाओं में बहने लगते हैं। देशभक्ति गीत सुनकर हमारा मन देशभक्ति की भावना से भर उठता है। इसी तरह से गीत हमारी भावनाओं से जुड़कर हमें भावनात्मक सहयोग प्रदान करते हैं। संगीत ने हमारे जीवन को प्रभावित ही नहीं किया, बल्कि उसे बदल कर रख दिया है। और भावों की अभिव्यक्ति तो गीतों के माध्यम से ही संभव हुई है। शायद इसीलिए संगीत अब हमारे और हम सबके जीवन का अभिन्न अंग है। दुनिया में कितनी भी भाषाएँ हो जाएँ, लेकिन संगीत से अच्छी कोई भाषा नहीं हो सकती है, जिसे सब समझते हैं। संगीत ब्रह्माण्ड को आत्मा देता है, मन को पंख देता है, कल्पना और जीवन को हर चीज़ के लिए उड़ान देता है। संगीत में उपचार की शक्ति है, कई बार संगीत ही एकमात्र ऐसी औषधि होती है, जो हृदय और आत्मा के लिए आवश्यक है।


















