एक शाम किशोर दा के नाम” – जब शगुन गार्डन में गूंजे सुर, और रफी-किशोर फिर जिंदा हो गए

काशीपुर/ उत्तराखंड (नसरीन खान निशा ),,,, मंगलवार 4 अगस्त की शाम काशीपुर के लिए सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं थी। ये यादों, सुरों और सुकून की वो महफिल थी जहाँ बीते जमाने के दो सूरज किशोर कुमार और मोहम्मद रफी – एक साथ चमके।माक्षार्थ फाउंडेशन और सुरों के राही ने शगुन गार्डन को उस शाम रेट्रो का मंच बना दिया। मौका था किशोर दा की जयंती और रफी साहब की पुण्यतिथि का डबल ट्रिब्यूट।*जब पर्ची से तय हुई किस्मत, और सुरों से जीता दिल*कार्यक्रम की सबसे खास बात – कोई स्क्रिप्ट नहीं, कोई फिक्स लिस्ट नहीं।

आगाज डुएट से हुआ, फिर पर्ची सिस्टम, जिस कलाकार के हाथ जो पर्ची आई, वही गाना उसी अंदाज में गाना था। नतीजा? मंच पर हर 2 मिनट में नया रंग, नया अंदाज।दर्शक भी झूमे। तालियां कभी रुकी ही नहीं। लगा ही नहीं कि ये कवर सॉन्ग हैं। लगा जैसे किशोर दा खुद “एक अजनबी हसीना से” गुनगुना रहे हों, और रफी साहब “चौदहवीं का चांद” से आसमान उतार लाए हों।*कलाकारों ने बांधा समां*जितेंद्र वर्मा, अनूप गुप्ता, गोपाल ठाकुर, तरुण लोहनी, कौशल किशोर पंत, राजीव सक्सेना, अनुराग मेहरा, चारु कौशिक, रुचि वर्मा, बेबी फाल्गुनी पाठक, विवेक मिश्रा, राजकुमार यादव समेत सभी कलाकारों ने जान लगा दी। बेबी फाल्गुनी पाठक की प्रस्तुति पर तो पूरा गार्डन सीटियां बजाने लगा।*दीप से शुरू, तालियों पर खत्म*कार्यक्रम का शुभारंभ दर्जा राज्य मंत्री सुश्री सीमा चौहान, एन सी बाबा, और लता शर्मा ने दीप प्रज्वलन कर किया। मंच को संभाला योगेंद्र शर्मा गुड्डू ने।

उनकी चुटीली बातों और किशोर दा के किस्सों ने बीच-बीच में माहौल को और हल्का कर दिया।दर्शक दीर्घा में म्यूजिक लवर्स क्लब के फाउंडर रिज़वान किशोर,सौरव शर्मा, सुमन पंत, इक़बाल अदीब,अजय गुप्ता, डॉ शुभ्रा शर्मा,संजीव सक्सेना, संगीता यादव, कुलदीप श्रीवास्तव, सहित शहर के तमाम संगीत प्रेमी मौजूद रहे।आयोजकों ने कहा – “आज हमने साबित किया कि अच्छे गाने कभी पुराने नहीं होते। किशोर दा और रफी साहब आज भी उतने ही जवान हैं जितने 40 साल पहले थे।”वाकई, मंगलवार की रात काशीपुर सोया नहीं। वो सुरों के साथ जागता रहा।


















