काशीपुर-उत्तराखण्ड़

उ.अल्प. छात्रवृत्ति में करोड़ों का घोटाला, 44 एडमिशन और 154 को बांट दी छात्रवृत्ति, 4 स्तर का सत्यापन भी बना मजाक

WhatsApp Image 2026-04-18 at 09.08.39
previous arrow
next arrow

काशीपुर / देहरादून /उत्तराखंड (रिज़वान अहसन ),,,,उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग के तहत चलने वाली अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना में काशीपुर-गदरपुर बेल्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। पिछले दिनों अखबारों के खुलासे और कोतवाली में दर्ज तहरीर इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि कैसे अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से फर्जी स्कूलों, फर्जी छात्रों के नाम पर लाखों रुपये निकाले गए और चार-चार स्तरों पर हुआ सत्यापन भी इस झूठ को नहीं पकड़ पाया।

चार स्तरीय सत्यापन की फेल सिस्टम

अमर उजाला में प्रकाशित खबर के अनुसार अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में गदरपुर के मदरसे में 23 फर्जी मामले मिले हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस योजना में डीएनओ को करना था चार स्तरीय वेरिफिकेशन। खबर के अनुसार आश्वासन का सत्यापन इस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (आइटीएनओ), हेड नोडल ऑफिसर (डीएनओ) और निदेशालय स्तर पर किए जाने की व्यवस्था है। इसके बाद भी गदरपुर के एक-दो नहीं पूरे 23 मामले पकड़ में आए हैं। अखबार ने साफ लिखा है – अल्प संख्यक छात्रवृत्ति की जांच चीख-चीख कर कह रही है वेल-फेयर, फर्जी मामले उजागर हों”। सोचिए जब एक ब्लॉक में 23 केस हैं तो पूरे उधम सिंह नगर में कितना बड़ा खेल हुआ होगा।

स्कूल में 44 छात्र, छात्रवृत्ति 154 को

दूसरी खबर अमर उजाला, काशीपुर नगर, 19 जून की है। हेडलाइन है – “निजी स्कूल में प्रवेश हुए महज 44, छात्रवृत्ति 154 को बांट दी”
खबर के मुताबिक सरकारी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 110 फर्जी एडमिशन दिखाकर 6.27 लाख की छात्रवृत्ति का गबन कर लिया गया। यानी धरातल पर बच्चे 44 और कागजों में 154 को स्कॉलरशिप बंट गई।

मुख्यमंत्री को देना पड़ा जांच का आदेश

तीसरी खबर 18 जुलाई 2025, अमर उजाला, नैनीताल की है। इसमें खुलासा हुआ है कि घोटाला इतना बड़ा था कि खुद मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़ा।
हेडलाइन – “मुख्यमंत्री ने मदरसा में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के दिए आदेश”
उप-हेडलाइन – “खुलासा: सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल के नाम से भी ली गई अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति”ऒर वहां प्रबंधक एक मुस्लिम समाज के व्यक्ति कों दर्शाया गया जबकि ये स्कूल अल्पसंख्यक स्कूलों के दायरे में आता ही नहीं हैं
खबर में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठे हैं। वर्ष 2021-22, 2022-23 के अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले में 796 की सूची में 456 फर्जी मिले थे।

प्रिंसिपल की कोतवाली में तहरीर

सबसे ठोस सबूत चौथा प्रपत्र है, जो नेशनल एकेडमी जूनियर हाई स्कूल, मौ० थाना साबिक़ , काशीपुर की प्रधानाध्यापिका श्रीमती विमला यादव पत्नी स्व० शेर सिंह यादव द्वारा दिनांक 20-6-2025 को प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली काशीपुर को दी गई तहरीर है।

तहरीर में प्रधानाध्यापिका ने लिखा है:
दिनांक 16-4-2025 को शाम 4:23 बजे जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी ए.डी.ओ., सी.पी.ओ. रावत जी द्वारा व्हाट्सएप पर पी.डी.एफ. सूची भेजी गई, जिसमें वर्ष 2021-22 में हमारे विद्यालय के नाम पर छात्रवृत्ति प्राप्त की गई थी। जब सूची का अवलोकन किया तो ज्ञात हुआ कि किसी ने द्वारा हमारे विद्यालय को बदनाम करने और नुकसान पहुंचाने की नियत से षड्यंत्र के तहत धोखाधड़ी करके छात्रवृत्ति प्राप्त की गई है।
तहरीर के मुख्य बिंदु जो घोटाले को साबित करते हैं:

  1. सूची में 83 छात्र-छात्राएं कक्षा 6,7,8 के और 43 छात्र-छात्राएं कक्षा 9 व 10 के दर्शाए गए हैं, जबकि प्रार्थिनी का विद्यालय केवल कक्षा 8 तक ही संचालित होता है। वहां 9 और 10 की कक्षाएं हैं ही नहीं। 2. सूची में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका का नाम गुलफशा अंसारी एवं आई०एन०ओ० का नाम गुलसमीना दर्शाया गया है, जबकि इस नाम की कोई महिला/पुरुष हमारे विद्यालय में कार्यरत रही ही नहीं है।
  2. प्रधानाध्यापिका ने स्पष्ट लिखा है कि न तो उनके द्वारा कभी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया गया, न ही वेरिफिकेशन किया गया, न ही बोनाफाइड प्रमाण पत्र दिया गया। बैंक खाता और आधार कार्ड का पता लगाना आवश्यक है।
    यह एक संगठित साइबर फ्रॉड और विभागीय भ्रष्टाचार है, जहां स्कूल की आईडी हैक कर या फर्जी आईडी बनाकर अल्पसंख्यक छात्रों के नाम पर पैसा निकाला गया।
    सवाल जो समाज कल्याण विभाग से पूछे जाने चाहिए: 1. जब स्कूल 8वीं तक है तो 9वीं-10वीं के बच्चों का वेरिफिकेशन डीएनओ, आईएनओ और निदेशालय स्तर पर कैसे हो गया?
  3. वर्ष 2021-22 की छात्रवृत्ति की सूची 2025 में व्हाट्सएप पर क्यों भेजी जा रही है? 3. जिन बैंक खातों में पैसा गया, वे किसके हैं? क्या उनकी जांच हुई? 4. मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी दोषी अधिकारियों पर FIR क्यों नहीं हुई?
    यह खबर केवल काशीपुर की नहीं है, यह उत्तराखंड के हजारों गरीब अल्पसंख्यक छात्रों के हक पर डाका है। उत्तराखंड का अल्पसंख्यक समाज प्रशासन से मांग करता है कि इस पूरे मामले की जांच एसआईटी या विजिलेंस से कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए
RIZWAN AHSAN

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button