अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में गरिमामय कार्यक्रम आयोजित

महिला सशक्तिकरण और अधिकारों पर वक्ताओं ने रखे सारगर्भित विचार ||
कुलसचिव प्रो.सुनीता चंद्रा को ‘सशक्त महिला सम्मान’ से किया गया सम्मानित ||
शिक्षा ही महिला सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम – कुलपति वंगछुग दोर्जे नेगी ||
महिलाओं की भूमिका,अधिकार और सामाजिक जागरूकता पर हुआ व्यापक विमर्श ||
वाराणसी :- केन्द्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के अतिश सभागार में आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर/उपलक्ष्य पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें महिला सशक्तिकरण,अधिकारों और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया | कार्यक्रम का शुभारंभ कुलसचिव सुनीता चंद्रा द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ उन्होंने अपने स्वागत वक्तव्य में कहा कि महिलाओं के अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर व्यवहारिक जीवन में भी लागू होने चाहिए तभी समाज में वास्तविक समानता स्थापित हो सकेगी |
सारस्वत अतिथि प्रो.मंजू द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय परंपरा में नारी को ‘नर से नारायणी’ तक का सम्मान प्राप्त है उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध भी आवश्यक है जिससे परिवार,समाज और राष्ट्र का समुचित विकास संभव हो सके |
विशिष्ट अतिथि डॉ.सुनीता सुमन ने महिलाओं के स्वास्थ्य,शिक्षा,घरेलू हिंसा,प्रजनन अधिकार तथा किशोर स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला को अपने अधिकारों के प्रति सजग और सचेत रहना चाहिए |
मुख्य अतिथि प्रो.चंद्रकला त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्त्री में करुणा,संवेदना और सृजन की अद्भुत शक्ति निहित होती है जो समाज को मानवीय मूल्यों से समृद्ध बनाती है उन्होंने कहा कि स्त्री सम्पूर्णता की बात करती है और उसके भीतर करुणा स्वाभाविक रूप से विद्यमान होती है | स्त्री को अपने देह और अस्तित्व पर अधिकार मिलना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में भूमि और स्त्री पर स्वामित्व की प्रवृत्ति पुरुषों से जुड़ी मानी जाती रही है किंतु आज के समय में मानवीय संवेदनशीलता और सामाजिक सरोकारों के साथ स्त्री को मनुष्य के रूप में देखने की आवश्यकता है | आज इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो सुनीता चंद्रा मैडम को सशक्त महिला सम्मान से सम्मानित किया गया | विश्वविद्यालय के कुलपति वंगछुग दोर्जे नेगी महोदय ने अपने आशीर्वचन में कहा कि स्त्री के बिना बुद्धत्व की प्राप्ति संभव नहीं है उन्होंने कहा कि स्त्री सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है इसलिए महिलाओं को शिक्षित और जागरूक बनाना अत्यंत आवश्यक है |
कार्यक्रम का संचालन डॉ.ज्योति सिंह ने किया, जबकि अंत में सुजाता मैम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया |
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं और प्रतिभागियों ने महिला सशक्तिकरण, अधिकारों और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श किया | यह कार्यक्रम महिलाओं की भूमिका,उनके अधिकारों और समाज में उनकी गरिमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ |
इस आयोजन में डा.अनुराग त्रिपाठी,डॉ शुचिता,डॉ प्रशांत मौर्या,डॉ रवि रंजन द्विवेदी आदि गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहें ||


















