रसोई गैस सिलेंडर लीकेज भीषण अग्निकांड में पिता–पुत्री की दर्दनाक मृत्यु का मामला पहुँचा-मानवाधिकार आयोग-संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गंभीर उल्लंघन बताते हुए पीड़ित परिवार को10 लाख मुआवज़े की माँग
रसोई गैस सिलेंडर लीकेज से हुए भीषण अग्निकांड में पिता–पुत्री की दर्दनाक मृत्यु का मामला पहुँचा-मानवाधिकार आयोग-संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत गंभीर उल्लंघन बताते हुए पीड़ित परिवार को10 लाख मुआवज़े की माँग
मानवाधिकार की लड़ाई में डॉ. तारिक़ ज़की आगे — ग्राम जाफरकोट अग्निकांड में ₹10 लाख मुआवज़े की माँग
बिजनौर/लखनऊ।
जनपद बिजनौर के थाना चाँदपुर क्षेत्र स्थित ग्राम जाफरकोट में रसोई गैस सिलेंडर लीकेज से हुए भीषण अग्निकांड में पिता–पुत्री की दर्दनाक मृत्यु का मामला अब मानवाधिकार के मुद्दे के रूप में सामने आया है।
वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी डॉ. तारिक़ ज़की ने इस घटना को संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन एवं गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताते हुए उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

आयोग ने मामले को डायरी संख्या 1351/IN/2026 के अंतर्गत पंजीकृत कर लिया है।
आप को बताते चले कि
15 फरवरी 2026 को रसोई गैस सिलेंडर में कथित लीकेज के कारण घर में अचानक भीषण आग लग गई। हादसे में 42 वर्षीय अमित और उनकी लगभग 5 वर्षीय पुत्री डोली गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के बाद परिवार आर्थिक और सामाजिक संकट में घिर गया है।
वही दैनिक समाचार पत्रों मे प्रकाशित समाचारो का संज्ञान लेते हुए, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. तारिक़ ज़की ने कहा कि एलपीजी गैस जैसे अत्यंत ज्वलनशील पदार्थ के वितरण में “Highest Degree of Care” सिद्धांत लागू होता है। यदि सिलेंडर, वाल्व या सुरक्षा परीक्षण में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित गैस एजेंसी एवं आपूर्तिकर्ता कंपनी संयुक्त रूप से उत्तरदायी होंगी।
डॉ. ज़की ने माननीय आयोग से माँगें की हैं की पीड़ित परिवार को
₹10,00,000 (दस लाख रुपये) का प्रतिकर, तथा घटना की
न्यायिक/मजिस्ट्रियल जाँच,की जाए
सिलेंडर व रेगुलेटर की फॉरेंसिक जांच,
दोषी अधिकारियों व गैस वितरण एजेंसी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए
वही मृतक परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था। अब आश्रितों के सामने आजीविका, बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास का गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है।
यह मामला गैस सुरक्षा मानकों और वितरण एजेंसियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। अब निगाहें उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग की आगामी कार्यवाही पर टिकी हैं।
























