काशीपुर-उत्तराखण्ड़

मंदिर प्रांगण के हरे भरे पेड़ों पर चली आरियां, तो हों गया विवाद,दो पक्षो मे तनाव

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काशीपुर / उत्तराखंड (नसरीन खान निशा ),,, ग्राम वसई इस्लामनगर चौराहे पर बाबा मौज गिरी शिव मंदिर परिसर में हरे-भरे फलदार पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मंदिर प्रांगण में दो आम और एक सेमल के पेड़ काटे जाने के बाद दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।
मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। वन क्षेत्र अधिकारी देवेंद्र सिंह राजवीर ने कटे हुए पेड़ों को कब्जे में लेकर वन रेंज कार्यालय भिजवा दिया। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और जांच के उपरांत नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


इस दौरान दूसरे पक्ष के लोगों ने आरोप लगाया कि बाबा मौज गिरी शिव मंदिर सेवा समिति अवैध रूप से गठित की गई है। समिति के गठन के समय आसपास की ग्राम पंचायतों और ग्रामीणों को कोई सूचना नहीं दी गई, जबकि यह मंदिर क्षेत्र के कई गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र है। आरोप है कि मंदिर समिति द्वारा पूर्व में भी आम के हरे-भरे पेड़ काटे गए थे, जिनकी कीमत लगभग 10 लाख रुपये बताई जा रही है, लेकिन उस धन का कोई हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि इस बार भी दो हरे-भरे फलदार आम के पेड़ और एक सेमल का पेड़ काटा गया, जिसका ग्रामीणों द्वारा विरोध किया जा रहा है। डॉक्टर दीवान चंद बटला ने आरोप लगाया कि समिति मनमानी करते हुए बिना किसी वैध कारण के पेड़ों की कटाई कर रही है और समिति की वैधता पर भी गंभीर सवाल हैं। विवाद के केंद्र में वन विभाग द्वारा दी गई अनुमति भी है। आरोप है कि प्रभागीय वन अधिकारी, तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर (नैनीताल) की ओर से जारी आदेश में दो सूखे आम के पेड़ और एक सेमल के पेड़ को काटने की अनुमति दी गई थी, जबकि मौके पर हरे-भरे पेड़ों की कटाई की गई। कटे आम के पेड़ों पर पूर्व में वन विभाग द्वारा छप्पन संख्या अंकित की गई थी, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि जांच के दौरान पेड़ों की वास्तविक स्थिति क्यों नहीं परखी गई।
वहीं मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश पाल ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि वन विभाग से विधिवत अनुमति लेने के बाद ही पेड़ों को काटा गया है। उनके अनुसार मंदिर परिसर में चारदीवारी का निर्माण किया जाना है, इसी कारण पेड़ों की कटाई कराई गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विरोध कर रहे लोग मंदिर की भूमि पर अवैध रूप से दुकानें लगाकर बैठे हैं, जिन्हें हटाने के लिए न्यायालय ने 30 दिसंबर तक का समय दिया है। इसी नाराजगी के चलते पेड़ कटान को मुद्दा बनाया जा रहा है।फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है। अब देखना यह होगा कि जांच में पेड़ कटान से जुड़े तथ्य क्या सामने आते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।या नहीं तो इस मामले में जब वन क्षेत्र अधिकारी से कमरे पर पक्ष रखने की बात कही गई तो उन्होंने वाइट देने से इनकार कर दिया।

RIZWAN AHSAN

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