बढ़ते सोशल मीडिया ट्रेंड्स:युवा लड़के-लड़कियां अश्लील शब्दों और गालियों से व्यूज बढ़ा रही हैं,दुनिया कहां जा रही है

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक नया और चिंताजनक ट्रेंड उभर रहा है,जहां नवयुवक लड़के और लड़कियां अपने कंटेंट में अश्लील शब्दों,गालियों और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करके व्यूअर्स और फॉलोअर्स बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड न केवल युवाओं की भाषा और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है,बल्कि समाज की नैतिकता पर भी सवाल उठा रहा है।क्या यह लोकप्रियता की दौड़ में गिरावट का संकेत है,या डिजिटल दुनिया की कड़वी हकीकत?
सोशल मीडिया पर प्रभावशाली बनने की होड़ में कई युवा इंफ्लुएंसर्स अब पारंपरिक कंटेंट से हटकर विवादास्पद तरीके अपना रहे हैं।उदाहरण के तौर पर,टिकटॉक,इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर वीडियोज में खुले तौर पर गालियां देना,अश्लील जोक्स मारना या दूसरों को ट्रोल करना आम हो गया है।एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि कुवैत में किशोरों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव से उनकी भाषा में अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल बढ़ा है,और यह वैश्विक समस्या बन रही है।इसी तरह,ब्रिटेन में बीबीसी की जांच से सामने आया कि टिकटॉक पर राजनीतिक नेताओं को गाली देने वाले कंटेंट को ज्यादा पुश किया जा रहा है,जिससे युवाओं में यह ट्रेंड बढ़ रहा है।”यह सब व्यूज और एंगेजमेंट के लिए हो रहा है,”इंफ्लुएंसर्स बिना किसी हिचक के गालियां और अश्लील भाषा इस्तेमाल कर रहे हैं,बिना समाज या बच्चों के प्रभाव पर सोचे।यह ट्रेंड विशेष रूप से 15-25 साल के युवाओं में देखा जा रहा है,जहां लड़के और लड़कियां दोनों ही शामिल हैं।कुछ मामलों में,यह सेक्सटिंग या हानिकारक यौन व्यवहार तक पहुंच जाता है,जैसा कि एक अध्ययन में सामने आया कि किशोरों में अपमानजनक सेक्सटिंग बचपन की दुर्व्यवहार से जुड़ी हो सकती है।सरकारें और प्लेटफॉर्म्स क्या कर रही हैं?भारत में,सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों को अपमानजनक कंटेंट पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं,लेकिन कार्यान्वयन में कमी है।ब्रिटेन में,सेक्शन 127 एक्ट के तहत अश्लील या धमकी भरी मैसेजेस को अपराध माना जाता है।फिर भी,विशेषज्ञों का मानना है कि पैरेंट्स,स्कूल्स और युवाओं को खुद जागरूक होने की जरूरत है।
दुनिया कहां जा रही है?जब लोकप्रियता के लिए नैतिकता को ताक पर रखा जा रहा हो,तो क्या हम एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर रहे हैं जो संवेदनशीलता से दूर हो रही है?समाज को इस पर विचार करने की जरूरत है,वरना डिजिटल दुनिया की यह विषाक्तता वास्तविक जीवन को भी प्रभावित करेगी।





