वाराणसी/उत्तरप्रदेश

नौ गौरी–नौ दुर्गा मंत्रों से अभिमंत्रित हल्दी से सजेगा गौरा का गौना

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24 फरवरी से शुरू होंगी रस्में,27 को रंगभरी एकादशी पर निकलेगी बाबा विश्वनाथ की भव्य पालकी यात्रा ||

रंगभरी एकादशी और गौरा का गौना काशी की जीवंत परंपरा का प्रतीक है – महंत पं.वाचस्पति तिवारी ||

वाराणसी:- महाशिवरात्रि के दिव्य उत्सव के बाद अब काशी में शिव -विवाह की परंपराओं का अगला भावपूर्ण अध्याय प्रारंभ होने जा रहा है | रंगभरी (अमला) एकादशी के पावन अवसर पर निकलने वाली बाबा विश्वनाथ की ऐतिहासिक पालकी यात्रा से पूर्व माता गौरा के गौने की रस्में 24 फरवरी मंगलवार से विधिवत आरंभ होंगी | टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास “गौरा-सदनिका” में 23 फ़रवरी सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में महंत पं.वाचस्पति तिवारी ने विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा करते हुए बताया कि इस वर्ष भी काशी की शताब्दियों पुरानी लोकपरंपरा के अनुरूप नौ गौरी –नौ दुर्गा के आव्हान मंत्रों से अभिमंत्रित पावन हल्दी माता गौरा को अर्पित की जाएगी उन्होंने बताया कि 27 फरवरी शुक्रवार को रंगभरी एकादशी का मुख्य उत्सव मनाया जाएगा,जब बाबा विश्वनाथ की पालकी यात्रा सायंकाल मंदिर से प्रस्थान करेगी और नगर को भक्ति,उल्लास और रंगों से सराबोर कर देगी |

24 फरवरी को तेल-हल्दी से खुलेगा मांगलिक क्रम
सायं 6:45 बजे टेढ़ीनीम महंत आवास में चढ़ेगी हल्दी
पत्रकार वार्ता में बताया गया कि 24 फरवरी को सायंकाल 6:45 बजे माता गौरा की तेल हल्दी की रस्म अदा की जाएगी | इससे पूर्व काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर में विशेष अनुष्ठान संपन्न होगा जहां नौ गौरी और नौ दुर्गा के आव्हान मंत्रों से हल्दी को विधिवत पूजित और अभिमंत्रित किया जाएगा |

महंत पं.वाचस्पति तिवारी ने कहा कि काशी की लोकमान्यता के अनुसार गौरा केवल आराध्य देवी नहीं,बल्कि नगर की बेटी हैं | विवाहोपरांत जिस प्रकार घर- परिवार में दुल्हन को गौने से पूर्व हल्दी लगाई जाती है उसी आत्मीय भाव से माता गौरा को भी यह मंगल -रस्म अर्पित की जाती है | हल्दी अर्पण से पूर्व 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों के साथ विशेष पूजन होगा | शंखध्वनि और घंटानाद के बीच मंडप में विराजमान गौरा की चल प्रतिमा को परंपरागत रीति से हल्दी चढ़ाई जाएगी | गौनहारिनों की टोली पारंपरिक मंगलगीत और सोहर गाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देगी |

25 फरवरी को पालकी पूजन और षोडशी श्रृंगार
दोपहर तीन बजे पालकी पूजन,सायं 6:30 बजे दिव्य श्रृंगार
25 फरवरी बुधवार को दोपहर तीन बजे बाबा की पारंपरिक पालकी का पूजन किया जाएगा | पालकी की साफ-सफाई, रंग रोगन और सजावट का कार्य पूर्ण कर लिया गया है | सायंकाल 6:30 बजे माता गौरा का षोडशी श्रृंगार होगा | पारंपरिक काशी शैली में रेशमी वस्त्र,स्वर्णाभूषण,पुष्पमालाओं और चंदन रोली से सुसज्जित स्वरूप श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा | महंत पं. तिवारी ने बताया कि गौना के निमित्त महंत आवास अब गौरा के मायके का रूप ले चुका है | आंगन में सजा मंगल मंडप,दीवारों पर पारंपरिक अलंकरण और महिलाओं के गीत सब मिलकर उस पारिवारिक वातावरण की अनुभूति कराते हैं जो काशी की विशिष्ट पहचान है |

26 फरवरी को ‘गौरा-सदनिका’ में बाबा का आगमन
राजसी परिधान और विशेष ‘देव किरीट’ में सुसज्जित होंगे बाबा
26 फरवरी गुरुवार को सायं 6:30 बजे बाबा का गौना लेने “गौरा- सदनिका” में प्रतीकात्मक आगमन होगा | यह आयोजन उस लोकभाव को जीवंत करता है जब वर पक्ष दुल्हन को विदा कराने मायके पहुंचता है | इस अवसर पर बाबा विश्वनाथ की प्रतिमा को पारंपरिक राजसी पोशाक पहनाई जाएगी | इस वर्ष बाबा विशेष ‘देव किरीट’ धारण करेंगे जिसे काशी के परंपरागत किरीट शिल्पी नंदलाल अरोड़ा सजा रहे हैं | दशाश्वमेध क्षेत्र में महादेव के राजसी वस्त्र विनोद मास्टर द्वारा तैयार किए गए हैं जो अपने परिवार की चौथी पीढ़ी के सदस्य हैं | महंत ने बताया कि इन तैयारियों में काशी की शिल्प परंपरा की झलक स्पष्ट दिखाई देती है | पीढ़ियों से जुड़ी कारीगरी इस उत्सव को सांस्कृतिक गहराई प्रदान करती है |

27 फरवरी को रंगभरी एकादशी पर निकलेगी ऐतिहासिक पालकी यात्रा
सायं पांच बजे मंदिर से प्रस्थान,नगर भ्रमण में उमड़ेगा जनसैलाब
27 फरवरी शुक्रवार को रंगभरी एकादशी का मुख्य आयोजन होगा | ब्रह्ममुहूर्त में बाबा,माता गौरा और प्रथमेश का विशेष पूजन आचार्य सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में संपन्न होगा | सुबह सात बजे भोग श्रृंगार के बाद नौ बजे से श्रद्धालुओं के लिए दर्शन प्रारंभ हो जाएंगे | दोपहर 12:30 बजे भोग आरती संपन्न होगी,सायंकाल पांच बजे बाबा विश्वनाथ की पालकी मंदिर से प्रस्थान करेगी और निर्धारित समयानुसार नगर भ्रमण पर निकलेगी | मार्ग में श्रद्धालु अबीर-गुलाल और पुष्पवर्षा से बाबा और गौरा का स्वागत करेंगे |

रंगभरी एकादशी वह अवसर है जब बाबा विश्वनाथ माता गौरा को ससुराल से अपने धाम लाते हैं यह दिन काशी के लिए केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि सांस्कृतिक उत्सव है पूरा नगर रंग,भक्ति और उल्लास में डूब जाता है |

शिवांजलि’ से गूंजेगा लोक संगीत
गौना महोत्सव के अवसर पर टेढ़ीनीम महंत आवास में ‘शिवांजलि’ कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा | पुनित पागल के संयोजन में लोक एवं सुगम संगीत की प्रस्तुतियां होंगी | काशी की पारंपरिक धुनों पर आधारित भक्ति-गीत आयोजन को सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान करेंगे |

काशी की जीवंत परंपरा का उत्सव
पत्रकार वार्ता में महंत पं.वाचस्पति तिवारी ने कहा कि रंगभरी एकादशी और गौरा का गौना काशी की जीवंत परंपरा का प्रतीक है यहां वेद और लोक एक दूसरे के पूरक बनकर आस्था को उत्सव में परिवर्तित करते हैं |

नौ गौरी–नौ दुर्गा के मंत्रों से पूजित हल्दी
गौनहारिनों के मधुर मंगलगीत, ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार और नगर की आत्मीय सहभागिता ये सभी मिलकर काशी की सांस्कृतिक आत्मा को सजीव करते हैं | 24 फरवरी की संध्या से आरंभ होकर 27 फरवरी की रंगभरी एकादशी तक चलने वाला यह मांगलिक क्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है,बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी है | देवों की नगरी काशी में यह परंपरा इतिहास भर नहीं,बल्कि वर्तमान में जीवित आस्था है जहां हर वर्ष गौरा का गौना नगर को एक सूत्र में पिरो देता है और यह संदेश देता है कि परंपराएं तभी जीवंत रहती हैं जब समाज उन्हें उत्सव बनाकर निभाता है |

यात्रा मार्ग
गौरा की पालकी यात्रा 27 फरवरी को सांयकाल विश्वनाथ मंदिर के लिये प्रस्थान करेगी | पालकी टेढ़ीनीम महंत आवास से नवग्रह मंदिर होते हुए विश्वनाथ गली में प्रवेश करेगी वहां से साक्षी विनायक होते हुए ढुंढिराज गणेश से अन्नपूर्णा मंदिर के सामने से विश्वनाथ मंदिर मे पहुंचेगी विश्वनाथ मंदिर पहुचने पर बाबा की चल प्रतिमा सहीत पालकी गर्भगृह के दक्षिण द्वार से प्रवेश कराकर गर्भगृह में विराजमान कराया जाएगा | पालकी व चल प्रतिमा विश्वनाथ मंदिर में शयन आरती के बाद टेढ़ीनीम महंत आवास वापस आ जाएगा |

टेढ़ीनीम महंत आवास में रंगभरी एकादशी पर बाबा के गौने के विषय में महंत वाचस्पती से वार्ता जानकारी प्राप्त करते अपर पुलिस आयुक्त शिवहरी मीणा,एडीसीपी वैभव बांगड,डीसीपी काशी जोन गौरव वसंवाल,पुलिस उपायुक्त (सुरक्षा) अनिल कुमार यादव सहीत आला अधिकारी मौजूद थे |

पत्रकार वार्ता में महंत वाचस्पती के साथ शिव बारात समिति के संस्थापक दिलीप सिंह,संजीव रत्न मिश्र,मनोज शर्मा और सुशील त्रिपाठी सहित इत्यादि लोग मौजूद रहे ||

Sallauddin Ali

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