वाराणसी/उत्तरप्रदेश

तकनीकी आत्मनिर्भर भारत का साल 2025,एआई से लेकर अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा तक नई उड़ान

WhatsApp Image 2025-09-22 at 11.03.20
previous arrow
next arrow

वाराणसी :- साल 2025 भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी यात्रा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष अनुसंधान,परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं | विकसित भारत @2047 के विजन से जुड़ी यह प्रगति अब नीति और नवाचार दोनों स्तरों पर स्पष्ट दिखाई दे रही है | भारत सरकार के इंडिया एआई मिशन के तहत 10,000 करोड़ रुपये के निवेश से नैतिक व मानव केन्द्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास पर जोर दिया गया है | वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही तक देश की राष्ट्रीय कंप्यूट क्षमता 38,000 जीपीयू से अधिक हो गई यही नहीं, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल 2025 में भारत तीसरे स्थान पर पहुंचा जिससे उसका तकनीकी परिदृश्य और वैश्विक प्रभाव दोनों मजबूत हुए हैं |

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में नए अध्याय लिखे | मई 2025 में नोएडा और बेंगलुरु में 3-नैनोमीटर चिप डिजाइन इकाइयों की शुरुआत की गई | सितंबर में भारत की पहली स्वदेशी 32-बिट ‘विक्रम’ चिप प्रधानमंत्री मोदी को प्रस्तुत की गई। 2025 में देश में कुल 10 सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी मिली जिनमें 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ |

महत्वपूर्ण खनिज मिशन की शुरुआत के साथ दुर्लभ मृदा और आवश्यक खनिजों की घरेलू उपलब्धता को सुदृढ़ करने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए गए | इस मिशन पर 16,300 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है | सरकार ने 2025-26 के बजट में लिथियम, कोबाल्ट,जस्ता और अन्य 12 महत्वपूर्ण खनिजों पर कर छूट दी और 1,500 करोड़ रुपये की पुनर्चक्रण योजना को मंजूरी दी जिससे स्वच्छ और चक्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में नई राह खुली |

अंतरिक्ष क्षेत्र में जुलाई 2025 में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने से भारत की मानवयुक्त उड़ान क्षमताओं ने नई ऊंचाई छुई | इसके अलावा, इसरो ने नासा के साथ संयुक्त रूप से निसार उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया तथा 4,400 किलोग्राम भार वाले सीएमएस-3 उपग्रह के जरिए अपनी भारी-वाहन क्षमता की पुष्टि की |

ऊर्जा क्षेत्र में दिसंबर 2025 में ‘शांति’ नामक आण्विक ऊर्जा विधेयक लाया गया जिसने निजी भागीदारी के लिए दरवाजे खोले | राजस्थान में माही बांसवाड़ा एनपीपी सहित कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए |

अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नवंबर 2025 में एक लाख करोड़ रुपये के आरडीआई फंड और 10,579 करोड़ रुपये की ‘विज्ञान धारा’ योजना शुरू की गई | इन पहलों से प्रयोगशालाओं के उन्नयन,वैज्ञानिक प्रशिक्षण और अनुसंधान के व्यावहारिक उपयोग पर नया फोकस आया है |

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2025 वह साल रहा,जब भारत ने तकनीकी आत्मनिर्भरता को नारे से आगे बढ़ाकर नीति और नवाचार की ठोस हकीकत बना दिया ||

Sallauddin Ali

50% LikesVS
50% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
close