चिकनकारी की कहानी कहने वाली लखनऊ की फिल्म ‘अंजुमन’ का राष्ट्रीय संरक्षण

वाराणसी :- प्रसिद्ध फिल्मकार मुज़फ़्फ़र अली ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अपनी पुरस्कार विजेता हिंदी फिल्म अंजुमन (1986) की दुर्लभ 35 मिमी रिलीज़ प्रिंट नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एनएफडीसी नेशनल फ़िल्म आर्काइव ऑफ़ इंडिया एनएफएआइ को दान की है | नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मुज़फ़्फ़र अली ने यह प्रिंट एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम को औपचारिक रूप से सौंपी |
फिल्म अंजुमन का उत्तर प्रदेश,विशेषकर लखनऊ से गहरा सांस्कृतिक संबंध है | फिल्म की अधिकांश शूटिंग पुराने लखनऊ में की गई थी और यह शहर की तहज़ीब, नफ़ासत और पारंपरिक हस्तशिल्प परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है | यह फिल्म लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी कारीगरी से जुड़ी महिलाओं के जीवन को संवेदनशीलता के साथ चित्रित करती है तथा उनकी उत्कृष्ट कला के बावजूद उन्हें झेलनी पड़ने वाली सामाजिक आर्थिक चुनौतियों को उजागर करती है |
वर्ष 1986 में अंजुमन इंडियन पैनोरमा की आधिकारिक चयनित फिल्मों में शामिल रही | इसके साथ ही फिल्म को वैंकूवर फ़िल्म फ़ेस्टिवल और तेहरान फ़िल्म फ़ेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदर्शित किया गया | हालांकि अंतरराष्ट्रीय सराहना के बावजूद फिल्म को व्यावसायिक रूप से सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं किया जा सका |
इस अवसर पर मुज़फ़्फ़र अली ने कहा कि राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन के अंतर्गत एनएफडीसी एनएफएआइ द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य फ़िल्म जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है उन्होंने कहा कि सेल्युलॉइड माध्यम अत्यंत नाज़ुक होता है और समय के साथ रंगों व छवियों का नष्ट होना अत्यंत पीड़ादायक है उनके अनुसार, फ़िल्म संरक्षण का यह कार्य व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु का निर्माण है जिसे केवल राष्ट्र की व्यापक दृष्टि से ही संभव बनाया जा सकता है उन्होंने यह भी कहा कि अंजुमन जैसी फिल्म,जो लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को दर्शाती है उसका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना आवश्यक है |
एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने कहा कि देश की सिनेमाई विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है | भारत सरकार का राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन जिसे एनएफडीसी एनएफएआइ द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है | इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है उन्होंने अंजुमन की प्रति दान करने के लिए मुज़फ़्फ़र अली का आभार व्यक्त करते हुए फ़िल्म उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों से अपील की कि वे भी फिल्मों और फ़िल्म से संबंधित सामग्री को संरक्षण हेतु आगे आएँ |
उल्लेखनीय है कि फिल्म अंजुमन भारतीय सिनेमा में कई कलात्मक उपलब्धियों के लिए जानी जाती है फिल्म की मुख्य अभिनेत्री शबाना आज़मी ने संगीतकार ख़य्याम के निर्देशन में अपने स्वयं के प्लेबैक गीत गाए थे जिनके बोल शायर शाहरीयार और दिवंगत फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखे थे | इस प्रकार,अंजुमन न केवल एक महत्वपूर्ण सिनेमाई कृति है बल्कि उत्तर प्रदेश विशेषकर लखनऊ की सांस्कृतिक,सामाजिक और कलात्मक विरासत का एक अमूल्य दस्तावेज़ भी है ||





