ग्राम चौपाल समस्याओं के समाधान का मंच कम और प्रशासनिक खानापूर्ती अधिक-ग्रामीणों की शिकायतें,अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल..?
ग्राम चौपाल या सरकारी औपचारिकता..? ग्रामीणों की शिकायतें,अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल
धामपुर | बिजनौर
अलैहपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत टपरेला में आयोजित ग्राम चौपाल ने एक बार फिर प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया। काफी समय से लंबित आवास, पेंशन, राशन और बुनियादी सुविधाओं जैसी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखा—मगर समाधान के नाम पर वही पुराने आश्वासन दोहराए जाते रहे।

चौपाल में खंड विकास अधिकारी त्रिलोकचंद ने शिकायतें सुनीं और “शीघ्र निस्तारण” का भरोसा दिलाया, लेकिन ग्रामीणों का सवाल सीधा था—यदि पहले दिए गए वादों पर अमल हुआ होता, तो आज फिर वही पीड़ा क्यों दोहरानी पड़ती..?
एडीओ पंचायत अनिल कुमार ने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। इस पर ग्रामीणों ने तीखा प्रतिप्रश्न उठाया—जब पात्र लाभार्थी आज भी लाभ से वंचित हैं, तो क्या केवल योजनाओं की जानकारी देना ही प्रशासनिक जिम्मेदारी की पूर्ति मानी जाएगी..?
कृषि विभाग की ओर से किसानों से कृषि पंजीकरण अनिवार्य कराने की अपील की गई, मगर ग्रामीणों ने प्रक्रियाओं की जटिलता, कर्मचारियों की लापरवाही और बार-बार चक्कर कटवाए जाने की शिकायतें दर्ज कराईं। पंजीकरण में देरी की जिम्मेदारी आखिर किसकी—यह सवाल अनुत्तरित ही रहा।
ग्राम प्रधान बेबी रानी की अध्यक्षता और पंचायत सचिव योगराज सिंह के संचालन में हुए इस आयोजन के दौरान यह भावना उभरकर सामने आई कि ग्राम चौपाल समस्याओं के समाधान का मंच कम और प्रशासनिक खानापूरी अधिक बनती जा रही हैं।
कार्यक्रम में सौरभ कुमार, उमा रानी, कुलदीप कुमार, राम सिंह, रंजीत, शीशराम सिंह, अशोक कुमार, नफीस अहमद, कृपाल सिंह, विजेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सवाल अभी कायम है—क्या ग्राम चौपालें सचमुच जवाबदेही तय करेंगी, या फिर आश्वासनों की औपचारिकता बनकर रह जाएँगी?




























