कम राशन वितरण पर भड़का जनाक्रोश,वर्षों से चली आ रही कथित प्रणाली पर उठे सवाल-स्योहारा क्षेत्र में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज
कम राशन वितरण पर भड़का जनाक्रोश, वर्षों से चली आ रही कथित प्रणाली पर उठे सवाल
स्योहारा क्षेत्र में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज
स्योहारा।
सरकारी योजनाओं के तहत गरीब और पात्र परिवारों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से वितरित किया जाने वाला राशन स्योहारा क्षेत्र में लंबे समय से सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के लगभग सभी राशन डीलरों पर वर्षों से यह गंभीर आरोप लगते रहे हैं कि प्रति यूनिट निर्धारित मात्रा से कम राशन दिया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न तो व्यवस्था में सुधार दिखा और न ही दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।


5 किलो के बजाय 4–4.5 किलो राशन देने के आरोप
पात्र लाभार्थियों का कहना है कि सरकार द्वारा तय 5 किलोग्राम प्रति यूनिट के स्थान पर उन्हें अक्सर 4 या साढ़े 4 किलो ही राशन दिया जाता है। जब उपभोक्ता इस पर सवाल उठाते हैं तो कभी ई-पॉस मशीन की खराबी, कभी वजन की कमी तो कभी ऊपर से कम आपूर्ति का हवाला देकर उन्हें चुप करा दिया जाता है। कई लाभार्थी डर के कारण विरोध नहीं कर पाते कि कहीं उनका नाम ही न काट दिया जाए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कटौती अब एक तरह की “प्रणाली” बन चुकी है, जिसे सब जानते हैं लेकिन कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं। आधार, ई-पॉस मशीन और ऑनलाइन रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाएं लागू होने के बावजूद यदि पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।
व्यापारी नेता एवं समाजसेवी अरुण कुमार वर्मा ने कहा,
“गरीब और पात्र परिवारों के हक पर लगातार डाका डाला जा रहा है। सरकार पूरी मात्रा में राशन भेज रही है, लेकिन डीलरों द्वारा प्रति यूनिट कटौती करना अपराध की श्रेणी में आता है। यदि प्रशासन ने शीघ्र सख्त कार्रवाई नहीं की, तो व्यापारी समाज और नागरिक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”
वहीं, प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. मनोज कुमार वर्मा ने भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा,
“राशन गरीबों के जीवन और पोषण से जुड़ा विषय है। ई-पॉस और डिजिटल व्यवस्था के बावजूद यदि पूरा राशन नहीं मिल पा रहा है, तो यह सिस्टम की बड़ी विफलता है। बिना पूर्व सूचना के जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
पत्रकार अमीन अहमद की मांग
पत्रकार अमीन अहमद ने स्योहारा क्षेत्र की सभी राशन दुकानों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि वर्षों से चली आ रही इस कथित मनमानी पर अब पूर्ण विराम लगना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उपभोक्ताओं के सवाल करने पर डीलर खुले शब्दों में कहते हैं कि “ऊपर से ही कटौती होकर राशन आता है, तो पूरा कैसे दें?”
समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन व खाद्य विभाग से मांग की है कि स्योहारा की सभी राशन दुकानों की निष्पक्ष जांच, दोषी डीलरों के लाइसेंस निरस्त, और पात्र लाभार्थियों को उनका पूरा हक दिलाया जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि प्रशासन इस बढ़ते जनाक्रोश को कितनी गंभीरता से लेता है और कम राशन देने की यह कथित व्यवस्था कब बदलेगी?
— आईरा न्यूज़ नेटवर्क





