इतने में तो चाय–पकौड़ी भी मुश्किल!”-अप्रैल-मई में यूपी पंचायत चुनाव, खर्च सीमा तय-उम्मीदवार बोले: अब प्रचार करें या समोसे तलें?

“इतने में तो चाय–पकौड़ी भी मुश्किल!”
अप्रैल-मई में यूपी पंचायत चुनाव, खर्च सीमा तय — उम्मीदवार बोले: अब प्रचार करें या समोसे तलें?
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में अप्रैल-मई में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर सरकार ने उम्मीदवारों के खर्च की सीमा तय कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार—
🏡 ग्राम प्रधान प्रत्याशी: ₹1.25 लाख
👥 ग्राम पंचायत सदस्य: ₹10,000
🏘️ क्षेत्र पंचायत सदस्य: ₹1 लाख
🏢 जिला पंचायत सदस्य: ₹2.5 लाख
🧑💼 क्षेत्र पंचायत प्रमुख: ₹3.5 लाख
से अधिक खर्च नहीं कर सकेंगे।
अब सवाल ये उठता है कि —
इतने में तो उम्मीदवार सुबह की मीटिंग में ही चाय-पकौड़ी का बिल निकाल देते हैं! ☕🤣
और फिर चिंता की एक और किस्म सामने आई है —
“मधुशाला प्रेमियों” का क्या होगा? 🍾
उनका तो पूरा चुनावी बजट ही आउट हो गया!
एक संभावित “मोदी बंदी” वाले प्रत्याशी और एक पूर्व प्रधान ने नाम न छापने की शर्त पर कहा —
“जनता को बुलाओ, पंडाल लगाओ, चाय-पानी कराओ… और फिर सुनो कि खर्च ₹1.25 लाख में समेट लो!
साहब, ये तो ‘पारदर्शी चुनाव’ नहीं, ‘सादा भोज चुनाव’ है!”
उधर चुनाव अधिकारी का कहना है —
“नियम सबके लिए समान हैं, ज्यादा खर्च करने वालों पर कार्रवाई होगी।”
मतलब साफ है —
अब यूपी पंचायत चुनावों में जीत वही पाएगा, जो चाय कम और नारे ज़्यादा बनाएगा! 😅
📍 आईरा न्यूज़ नेटवर्क
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