इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल (आइपीएएफ)वाराणसी 2026 ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भव्य उत्सव मनाया

वाराणसी :- इंटरनेशनल परफॉर्मिंग आर्ट्स फेस्टिवल (आइपीएएफ) वाराणसी 2026 का सफल आयोजन 18 फ़रवरी बुधवार को प्रतिष्ठित पं.ओंकार नाथ ठाकुर ऑडिटोरियम बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)वाराणसी में संपन्न हुआ | इस भव्य आयोजन में देश-विदेश के प्रसिद्ध कलाकारों,सांस्कृतिक प्रेमियों और गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही जिन्होंने भारतीय प्रदर्शन कलाओं की समृद्ध परंपरा का उत्सव मनाया | आइपीएएफ के विज़न के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव ने एक बार फिर पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण,दिव्यांग कलाकारों के समर्थन तथा उभरते और प्रतिष्ठित कलाकारों को वैश्विक मंच प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया |
सामाजिक उद्यमी श्याम पांडेय की परिकल्पना से आरंभ हुआ |आइपीएएफ इस उद्देश्य के साथ निरंतर कार्य कर रहा है कि कोई भी प्रतिभा मंच,पहचान और अवसर के अभाव में पीछे न रह जाए | पिछले नौ वर्षों में आइपीएएफ ने भारत के विभिन्न राज्यों की राजधानियों एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहरों लद्दाख से तिरुवनंतपुरम और इम्फाल से अहमदाबाद तक 200 से अधिक महोत्सव सफलतापूर्वक आयोजित किए हैं और अब यह वैश्विक स्तर पर भी अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति को विस्तार दे रहा है |
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ जिसके पश्चात मुख्य अतिथि,विशिष्ट अतिथियों तथा कलाकारों का सम्मान किया गया | पूरे आयोजन के दौरान सांस्कृतिक गौरव और कलात्मक एकता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला |
सांस्कृतिक संध्या की मुख्य प्रस्तुतियाँ
इस महोत्सव में प्रस्तुत उत्कृष्ट कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया |
प्रो.संगीता पंडित एवं समूह द्वारा शास्त्रीय गायन प्रस्तुति
दर्शकों ने भारतीय शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत की मनमोहक यात्रा का अनुभव किया | बनारस घराने की परंपरा से जुड़ी ठुमरी, दादरा,कजरी और चैती जैसी शैलियों की उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा गया | डॉ.खिलेश्वरी पटेल एवं समूह द्वारा भरतनाट्यम प्रस्तुति
“कृष्णवैभवम्” शीर्षक से प्रस्तुत इस नृत्य नाटिका में भगवान श्रीकृष्ण के बाललीलाओं से लेकर गीता के दिव्य उपदेश तक की यात्रा को प्रभावशाली अभिनय (अभिनय) और सुंदर नृत्य (नृत्य) के माध्यम से दर्शाया गया |
जटाशंकर चोलर नृत्य दल द्वारा चौलर लोक नृत्य
विन्ध्याचल क्षेत्र की दुर्लभ लोक परंपरा पर आधारित इस जीवंत प्रस्तुति ने मिर्जापुर की कजरी परंपरा की सांस्कृतिक गहराई को दर्शाया तथा विलुप्त होती लोक कला के संरक्षण के प्रयासों को सराहना दिलाई | इन सभी प्रस्तुतियों ने शास्त्रीय,भक्ति और लोक परंपराओं के सामंजस्य को दर्शाते हुए आइपीएएफ के सांस्कृतिक समावेशन और कलात्मक सहयोग के दृष्टिकोण को साकार किया |
आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रमुख प्रायोजकों बैंक ऑफ इंडिया तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का हृदय से आभार व्यक्त किया | इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि आइपीएएफ केवल कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने का मंच ही नहीं है बल्कि यह परंपरा और आधुनिक दर्शकों के बीच सेतु बनाकर कलाकारों के लिए सार्थक अवसर भी सुनिश्चित करता है |
कार्यक्रम का समापन भावपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ जिसमें कलाकारों, अतिथियों,प्रायोजकों और दर्शकों के सामूहिक सहयोग को आइपीएएफ वाराणसी 2026 की सफलता का आधार बताया गया |
आइपीएएफ अपनी वैश्विक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए डबलिन,लंदन,सिंगापुर, स्वीडन,मॉस्को और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहरों में भी महोत्सव आयोजित करने की योजना के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर ले जाने की दिशा में अग्रसर है ||
























