AIRA NEWS NETWORK – EPF Rules Change ! EPFO के कई नियमों में बदलाव किया गया है अगर आप भी ईपीएफओ के अंशधारक हैं तो आपके लिए उन सभी बातों को जानना जरूरी है जिन्हें आप नहीं जानते हैं.
चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर को घटाकर 8.1 फीसदी कर किया गया है. यह कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका है. इससे पहले पीएफ पर ब्याज दर (PF Interest Rate) 8.5 फीसदी था. हालांकि, बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit-FD) की तुलना में अभी भी इस पर ज्यादा ब्याज (Interest Rate) दिया जा रहा है.
अब PF का ब्याज (PF Interest) पूरी तरह से टैक्स फ्री नहीं है. इसे कई वर्गों में बांट दिया गया है. अलग-अलग वर्ग के लिए निवेशकों (Investor) को अलग-अलग इनकम टैक्स देना होता है. बदले गए नियमों के मुताबिक, प्रॉविडेंट फंड (Provident Fund) में सालाना 2.50 लाख रुपये तक निवेश (Invest) ही टैक्स फ्री (Tax Free) रहेगा. इससे ज्यादा निवेश और उस पर मिलने वाले ब्याज को अब इनकम माना जाएगा और उस पर आपको इनकम टैक्स (Income Tax) देना होगा.
अप्रैल 2021 से पहले निवेश (Invest) की गई किसी भी राशि पर और उस पर मिलने वाले ब्याज (Interest) पर कोई टैक्स देना नहीं होता था. इसलिए बहुत सारे कर्मचारी अनिवार्य सीमा से ज्यादा पीएफ कटवाते थे ताकि ज्यादा ब्याज मिले. मगर अब ऐसा नहीं है. अगर आपका नियोक्ता पीएफ (PF) में कोई योगदान नहीं करता है तो 5 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है.
प्रॉविडेंट फंड (Provident Fund) में नियोक्ता की ओर से मूल वेतन का 12 फीसदी और कर्माचारी की ओर से 12 फीसदी का निवेश (Invest) किया जाता है. नियोक्ता के 12 फीसदी हिस्से में से 8.33 फीसदी हिस्सा ईम्प्लॉयीज पेंशन (Employees Pension) स्कीम (pension scheme) में जाता है. बाकी 3.67 फीसदी राशि आपके पीएफ अकाउंट (PF Account) में जमा होता है. पेंशन स्कीम में दी जाने वाली राशि पर कोई ब्याज (Interest) नहीं मिलता है क्योंकि इसके तहत निवेशक (Investor) और नियोक्ता का योगदान जरूरी होता है.





