AIRA NEWS NETWORK – मेहनतकश फिर से एक होने लगे थे, फिर एक बार पूरे विश्व मे इंकलाब होने लगा था, मेहनती मजदूरों को ये लगाने लगा है कि अब और नही , बस जो हुआ बहुत हुआ, क्योंकि हजारों बर्षो से जो दब रहा है उन्हें दबाते आ रहे है और हमेशा दबाते रहेंगे, आधुनिकता की दौर में अब पूंजीपतियों को मेहनतकश के पसीने से दुर्गन्ध आने लगा है इसलिए वो मजदूरों को हटा कर रोबोट को अपना गुलाम बना रहे है और गरीब मजदूरों को और भी शोषित किया जा रहा है।
पूरे विश्व के मजदूर जाग रहे है, पर पूंजीपति तो आज के भाग्य विधाता है उन्हें हर बात की खबर होती है इसलिए पूरे विश्व मे मेहनती मजदूरों को मिक्सर में पिसा जा रहा है बहुत ही बारीकी से ,ताकि पूंजीपतियों को स्वाद अच्छा लगे एवं कुछ चंद पूंजीपति पुरी दुनिया पर राज कर सके….
कई देशों ने अपने खराब छवि को ठीक करने के लिए और जनता पर अपनी मनमानीयो के लिए कोविड महामारी (आपदा ) को अवसर के रूप में बदलने का काम किया है अमरीका, ब्राजील और भारत सहित विश्व के कई ऐसे देश है जो इस महामारी को रोकने के बजाय उसे और भी फैलने दिया।
भारत देश इस महामारी में दुनिया के काफी सारे रिकॉर्ड तोड़े है जैसे अर्थव्यवस्था की गिरावट का रिकॉर्ड हो या बेरोजगारी का या फिर कालाबाजारी हो या महंगाई का, कोविड को रोकने में नाकामयाब भारत सरकार निजीकरण करने में व्यस्त है, जबकि भारत सरकार चाहती तो कोविड पर काफी अच्छे से लगाम लगा सकती थी पर कोरोना के प्रथम लहर में नमस्ते ट्रम्प और दूसरे लहर में बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार ने देश को कोरोना की ओर और काफी तेजी से ले गया, और आज भयावह स्थिति बनी हुई है।
देश मे विकास का मुद्दा गायब, मजदूरों का मुद्दा गायब, किसानों की आत्महत्या थमने का नाम नही ले रहा, शिक्षा व्यवस्था चौपट हुआ जा रहा है, देश के लोग कोरोना क्या ? भारतवासी दुनियाभर के वायरस को अपने मे समा सकते है, क्योंकि यहाँ मेहनती मजदूर है, जो अपने मेहनत के बल पर पहाड़ भी फोड़ सकता है! पर भूख नाम का वायरस इस देश को हजारो बर्षो से निगल रहा है ,भूख नामक वायरस का इलाज है किसी के पास ?


















