असम/गुवाहाटी

काज़ीरंगा विश्वविद्यालय ने घोषणा की असम और पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए नई दूरदर्शी पहल

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काज़ीरंगा विश्वविद्यालय ने घोषणा की असम और पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए नई दूरदर्शी पहल
ज्ञान का निर्माण • अवसरों का सृजन • भविष्य का निर्माण
गुवाहाटी:
काज़ीरंगा विश्वविद्यालय ने आज एक महत्वाकांक्षी रोडमैप का अनावरण किया। इसके तहत विश्वविद्यालय का लक्ष्य वैश्विक स्तर से जुड़ी शिक्षा, अत्याधुनिक अनुसंधान, उद्यमिता और उद्योग जगत के सहयोग के माध्यम से असम और पूर्वोत्तर भारत के परिवर्तन में एक रणनीतिक ज्ञान एवं नवाचार साझेदार के रूप में अपनी पहचान स्थापित करना है।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए काज़ीरंगा विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर श्री बसंत खेतान ने कहा कि विश्वविद्यालय संस्थान निर्माण के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जो ‘विकसित असम’ और ‘विकसित भारत 2047’ की आकांक्षाओं के अनुरूप है।
“विश्वविद्यालयों का भविष्य केवल डिग्रियाँ प्रदान करने तक सीमित नहीं है। उन्हें नवाचार, उद्यमिता, कौशल विकास और सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक केंद्र बनना होगा। हमारा लक्ष्य काज़ीरंगा विश्वविद्यालय को एक ऐसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित संस्थान के रूप में विकसित करना है, जो युवाओं को सशक्त बनाए, समुदायों को मजबूत करे और असम तथा पूर्वोत्तर भारत के सतत विकास में प्रत्यक्ष योगदान दे।”
शुरू हो रहा है असम का सुनहरा दौर:
प्रो-चांसलर ने कहा कि असम अपने इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण विकास कालों में से एक का साक्षी बनने जा रहा है। बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) और सतत विकास के क्षेत्रों में हो रहे बड़े निवेश राज्य को पूर्व की ओर भारत के प्रवेश द्वार (गेटवे टू द ईस्ट) के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी तथा पूर्वोत्तर भारत में वैश्विक स्तर पर बढ़ती रुचि के चलते कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व अवसरों के सृजित होने की संभावना है। इनमें सतत कृषि, रेशम एवं रेशम पालन (सेरिकल्चर), खाद्य प्रसंस्करण, नदी एवं जल प्रबंधन, बाढ़ से निपटने की क्षमता (फ्लड रेज़िलिएंस), जैव विविधता, जलवायु अनुकूलन, उन्नत विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग), सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और भविष्य की प्रौद्योगिकियाँ प्रमुख हैं।
काज़ीरंगा विश्वविद्यालय का मानना है कि इस परिवर्तन और विकास का सबसे अधिक लाभ असम के युवाओं तक पहुँचना चाहिए।
संकल्प से साकार तक:
विश्वविद्यालय ने कई रणनीतिक पहलों की घोषणा की, जो उसकी दूरदृष्टि को ठोस और मापनीय परिणामों में बदलने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
प्रमुख पहलों में शामिल हैं:
• विद्यार्थियों के नेतृत्व वाले नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ रुपये का ‘केयू स्टार्टअप फंड’ ।
• आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी मेधावी छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए 3 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति योजना।
• तेजी से विस्तार कर रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने हेतु इंटेल एआई लैब की स्थापना।
• भारत के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और मोबिलिटी क्षेत्र में हो रहे बदलावों के अनुरूप इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) प्रौद्योगिकी और औद्योगिक रोबोटिक्स में विशेष पाठ्यक्रमों की शुरुआत।
• इंस्टीट्यूट ऑफ एनालिटिक्स (यूके) के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डेटा एनालिटिक्स कार्यक्रमों की शुरुआत।
• बजाज जनरल क्वेस्ट हैकाथॉन और पीडब्ल्यूसी लॉन्चपैड जैसी पहलों के माध्यम से उद्योग-केंद्रित अनुभवात्मक शिक्षण को बढ़ावा।

ये पहलें ऐसे स्नातकों को तैयार करने के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष (इंडस्ट्री-रेडी) और नवाचार-प्रेरित हों।

भविष्य के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तहत परिकल्पित शैक्षणिक परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए काज़ीरंगा विश्वविद्यालय अपने शैक्षणिक ढाँचे को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप, मांग-आधारित और बहुविषयक शिक्षा पर केंद्रित करते हुए पुनर्गठित कर रहा है।
भविष्य में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कार्यक्रमों का विशेष फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी, स्मार्ट कृषि, ब्रह्मपुत्र नदी अध्ययन, क्लाइमेट रेज़िलिएंस, प्रकृति-आधारित समाधान, स्वास्थ्य सेवा नवाचार, उद्यमिता तथा वैश्विक रोजगार क्षमता जैसे उभरते क्षेत्रों पर होगा।
विश्वविद्यालय का मानना है कि अब सफलता का आकलन केवल स्नातक तैयार करने से नहीं होगा, बल्कि ऐसे समस्या समाधानकर्ता, नवप्रवर्तक (इनोवेटर), उद्यमी और रोजगार सृजक तैयार करने से होगा, जो समाज और देश के विकास में सार्थक योगदान दे सकें।

असम को विश्व से जोड़ना:
विश्वविद्यालय का मानना है कि वैश्विक उच्च शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालय भारत में सहयोग और शैक्षणिक केंद्र स्थापित कर रहे हैं। हालांकि शुरुआत में उनका ध्यान मुख्यतः महानगरों पर केंद्रित था, लेकिन अब वे भारत के विविध क्षेत्रों में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, विश्वसनीय शैक्षणिक साझेदारों और सार्थक सहयोग के अवसरों की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं।
काज़ीरंगा विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी एक्सचेंज, ड्यूल-डिग्री कार्यक्रमों तथा वैश्विक मानकों पर आधारित शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत के प्रतिभाशाली युवाओं और दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों, उद्योगों तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में अपनी भूमिका को सक्रिय रूप से स्थापित कर रहा है।
विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण स्पष्ट है—पूर्वोत्तर भारत को केवल प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का स्रोत बनाना नहीं, बल्कि उसे ज्ञान, नवाचार और अनुसंधान के वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में स्थापित करना।

नए दौर का शैक्षणिक नेतृत्व:
इस अवसर पर फरवरी 2026 में पदभार ग्रहण करने वाले कुलपति डॉ. एम. एल. गौर ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक कार्ययोजना (अकादमिक रोडमैप) प्रस्तुत की। डॉ. गौर के पास भारत के सात राज्यों में 41 वर्षों से अधिक का बहुआयामी पेशेवर अनुभव है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालयों में वैज्ञानिक, प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डीन, संस्थापक प्राचार्य और कुलपति जैसे विभिन्न नेतृत्वकारी पदों पर कार्य किया है। उनका कार्यक्षेत्र अनुसंधान, संस्थागत विकास, इंजीनियरिंग शिक्षा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जल संसाधन, शैक्षणिक प्रशासन, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (इनोवेशन इकोसिस्टम) और सार्वजनिक नीति तक विस्तृत रहा है। इसके साथ ही उन्होंने अनेक राष्ट्रीय परियोजनाओं का नेतृत्व किया है तथा सरकारी संस्थाओं, उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ महत्वपूर्ण सहयोग भी किया है।
डॉ. एम. एल. गौर ने कहा,“अगला दशक पूर्वोत्तर भारत का है। विश्वविद्यालय कल की अर्थव्यवस्था के लिए बीते हुए कल का पाठ्यक्रम नहीं पढ़ा सकते। हम ज्ञान को कौशल से, अनुसंधान को नवाचार से और शिक्षा को उद्यमिता से जोड़कर विद्यार्थियों को उन करियरों के लिए तैयार कर रहे हैं, जो अभी उभर रहे हैं। हमारा उद्देश्य केवल नौकरी तलाशने वाले युवाओं को तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार सृजक बनाना है।” उन्होंने आगे कहा कि पिछले पाँच महीनों के दौरान उन्होंने असम की असाधारण वैज्ञानिक क्षमता, उद्यमशील ऊर्जा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा है।
उन्होंने कहा,“हर क्षेत्र में ऐसी विशिष्ट क्षमताएँ होती हैं, जिनका पूरी तरह से उपयोग किया जाना अभी बाकी है। असम में वे सभी संभावनाएँ मौजूद हैं, जो इसे भारत के अग्रणी ज्ञान और नवाचार केंद्रों में से एक बना सकती हैं। काज़ीरंगा विश्वविद्यालय इन क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सतत आजीविका के अवसरों में बदलने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

साझेदारी ही नया मॉडल:
विश्वविद्यालय ने पब्लिक-प्राइवेट-पीपल पार्टनरशिप (पीपीपीपी) के एक सशक्त और प्रभावी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
काज़ीरंगा विश्वविद्यालय सीएसआईआर –एनईआईएसटी, टोकलाई टी रिसर्च इंस्टीट्यूट, एआईआई एमएस, आईआईटी, एनआईटी तथा अन्य अग्रणी उद्योगों के साथ अपने सहयोग का विस्तार कर रहा है। साथ ही, अपोलो हॉस्पिटल्स, एनईसी, इंटेल, एडुलेटरल, लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम जैसे संगठनों के साथ भी उन्नत स्तर की बातचीत जारी है। इन साझेदारियों का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए अनुसंधान, कौशल विकास, इंटर्नशिप, नवाचार और रोजगार के अवसरों को और अधिक सशक्त बनाना है।

असम की जड़ों से जुड़ा, वैश्विक दृष्टि वाला विश्वविद्यालय
असम की सांस्कृतिक राजधानी जोरहाट में स्थित काज़ीरंगा विश्वविद्यालय शिक्षा को क्षेत्र की पारिस्थितिक, कृषि, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के साथ जोड़ने की विशिष्ट क्षमता रखता है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य एक ऐसे वैश्विक स्तर पर जुड़ा हुआ शैक्षणिक संस्थान बनना है, जहाँ स्थानीय ज्ञान का समन्वय वैश्विक विशेषज्ञता से हो, अनुसंधान क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित हो, और शिक्षा सतत विकास, उद्यमिता तथा समावेशी विकास को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे।
प्रेस वार्ता के समापन पर श्री बसंत खेतान ने शिक्षा, नवाचार और सहयोग के माध्यम से असम तथा पूर्वोत्तर भारत को और अधिक सशक्त बनाने के लिए असम सरकार, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और समाज के साथ मिलकर कार्य करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

HALIMA BEGUM

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