डा. भीम राव अम्बेडकर के नाम पर चल रहे विद्यालयों का भंडा फोड़

मिर्जापुर: मझवा विकाश खंड के आही ग्राम पावर हाउस के बगल के विद्यालय की सच्चाई
डॉ. भीमराव अंबेडकर और मूल निवासियों के नाम पर चल रहे फर्जी विद्यालय, सरकार कर रही करोड़ों की भरपाई, मौके पर एक भी छात्र नहीं
वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई जिलों में डॉ. भीमराव अंबेडकर और मूल निवासियों के नाम पर संचालित हो रहे दर्जनों विद्यालयों में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इन स्कूलों को सरकार से मान्यता और अनुदान मिल रहा है, करोड़ों रुपये की भरपाई हो रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर एक भी छात्र पढ़ता नहीं मिल रहा।
क्या है मामला
सूत्रों के अनुसार जिले में अनुसूचित जाति/जनजाति और मूल निवासी बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष योजना के तहत कई निजी विद्यालयों को मान्यता दी गई थी। कागजों पर इन स्कूलों में सैकड़ों बच्चों का नामांकन दिखाया गया है। इसी आधार पर सरकार हर साल प्रति छात्र के हिसाब से शुल्क प्रतिपूर्ति, मिड-डे मील, ड्रेस और किताबों का पैसा जारी कर रही है।
ग्राउंड रिपोर्ट में खुलासा
की टीम ने जब वाराणसी के तीन ब्लॉकों में ऐसे 5 विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:
- ताला बंद मिला स्कूल: दो विद्यालयों पर पिछले 6 महीने से ताला लटका है। आसपास के लोगों ने बताया कि यहाँ कभी कोई क्लास नहीं लगती।
- सिर्फ बोर्ड लगा है: एक जगह सिर्फ टिन का बोर्ड “डॉ. भीमराव अंबेडकर आवासीय विद्यालय” लगा है। अंदर खंडहर और झाड़-झंखाड़ हैं।
- शिक्षक-छात्र गायब: दो स्कूल खुले मिले लेकिन वहाँ न कोई शिक्षक मिला, न ही एक भी छात्र। रजिस्टर में 200+ बच्चों की हाजिरी रोज लग रही है।
कैसे हो रहा खेल
नाम न छापने की शर्त पर एक विभागीय अधिकारी ने बताया कि फर्जी नामांकन और फर्जी आधार कार्ड के जरिये बच्चों की संख्या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती है। सत्यापन सिर्फ कागजों पर होता है। बाबा साहेब के नाम का इस्तेमाल कर संवेदनशीलता का फायदा उठाया जा रहा है।
करोड़ों का नुकसान
एक अनुमान के मुताबिक सिर्फ वाराणसी जिले में ऐसे स्कूलों को सालाना 3 से 4 करोड़ रुपये का भुगतान हो रहा है। प्रदेश स्तर पर यह आंकड़ा सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकता है।
प्रशासन की चुप्पी
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने जाँच की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं समाज कल्याण विभाग के अधिकारी फोन नहीं उठा रहे।
यह घोटाला न सिर्फ सरकारी खजाने को चूना लगा रहा है बल्कि डॉ. अंबेडकर के शिक्षा के सपने और मूल निवासी समाज के बच्चों के हक को भी मार रहा है।


















