वाराणसी/उत्तरप्रदेश

लाइलाज बीमारियों का इलाज है सेराजेम थैरेपी_सेराजेम थेरेपी से हो रहा स्वास्थ्य में सुधार इसलिए पूरा विश्व इस पद्धति में विश्वास कर रहा है : अनिल मौर्या

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वाराणसी। एक दो एक दो बीमारी को फेक दो और एक दो तीन चार सेराजेम से कर लो प्यार स्लोगन ही आपकी थैरेपी की शुरुआत जगतगंज रामकटोरा रामपुरी कालोनी के सामने वाली बिल्डिंग में स्थित मुफ्त में चलाए जाने वाली सेंटर जहां असाध्य रोगों से पीड़ित लोगों का होता है इलाज यहां मुफ्त मिलती है दक्षिण कोरिया की सेराजेम थैरेपी कोई भी व्यक्ति इस थैरेपी का लाभ ले सकता है। सेंटर पर असाध्य रोगों से ग्रसित लोग आते हैं। इनमें मुख्य रूप से बीपी, शुगर, थायरायड, अस्थमा, लकवा, स्लिप डिस्क से पीड़ित शरीर के अंगों में दर्द से कराहते लोग होते हैं । प्रतिदिन ढाई सौ से तीन सौ महिला और पुरुष दूर दूर से सेंटर पर आते हैं। यहां एक व्यक्ति चालीस मिनट तक थैरेपी का लाभ ले सकता है सेंटर का समय सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक है। केवल भारत में नहीं दुनिया भर में लोग इसे पसंद कर रहे हैं सेराजेम थेरैपी के माध्यम से ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर किया जाता है। विश्व की सबसे प्राचीन सेराजेम थैरेपी द्वारा लोगों को दर्द से राहत दिलाई जा रही है। मुफ्त थैरेपी देने वाले सेराजेम चंदौली निवासी सेंटर के संचालक अनिल मौर्या ने बताया की सेंटर पर सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक लोगो को फ्री थैरेपी दी जा रही है । सेंटर पर सेवा भाव से लोगों को निशुल्क थैरेपी कराई जाती है यहां सेंटर पर आने वाला कोई भी व्यक्ति जब तक इस थैरेपी का लाभ ले सकता है जब तक उसे दर्द से राहत ना मिले। उन्होंने बताया कि इस थैरेपी की मशीनों की कीमत लाखों में हैं ऐसे में हर इंसान के लिए इसे खरीद पाना मुश्किल हैं पर जिस व्यक्ति का सामर्थ्य हो वो इसे ले सकता और इसका भरपूर लाभ घर ले जाकर ले सकता है और जो नहीं ले सकता वो यहां आकर हर दिन निशुल्क थैरेपी ले सकता है । साउथ कोरियन कम्पनी की यह थर्मल एक्यूप्रेशर थैरेपी जिसमे जेड स्टोन,रेड क्ले और कुछ खास पत्थर के मिश्रण लगे हुए हैं थेरेपी में इस्तेमाल होने वाले जेड स्टोन का इसमें सबसे खास महत्व है जेड स्टोन से एफ आई आर रेज निकलती है जो शरीर के टॉक्सिन को बाहर निकालने का काम करने के साथ साथ ऑक्सीजन लेवल को संतुलित रखती है साथ ही नर्व को खोलने का भी काम करती है तथा रक्त संचरण को अच्छा रखती है ये थैरेपी स्पाइनल कॉड रीड की हडडी पर दी जाती है जहां मानव के अंगों के एक्युप्रेशर पॉइंट होते हैं जिससे अंगों को ऊर्जा मिलती है और वह सुचारू रूप से अपना काम करने लगते हैं।यही नहीं यहाँ की स्टाफ अनामिका कुमारी,रॉबिन सिंह,खुशी मौर्या,ज्योति मौर्या,स्नेहा चौरसिया,आयुष कुमार और आकृति चौरसिया बहुत ही खुशमिजाज और काफी सहयोगपूर्ण रवैया वाली है। सारे के सारे इलाज हेतु आने वाले लोगों के प्रति इनका व्यवहार बहुत ही कुशल है। साथ ही साथ सेंटर पर बीमारियों से ग्रसित आने वाले लोगो को खुश रखने के लिए यहां विभिन्न प्रकार की गतिविधियां करवाई जाती हैं फैमिली अवॉर्ड दिया जाता है सेंटर पर आने वाले बच्चों को भी सेहत के प्रति जागरूक किया जा रहा है। रविवार को आए एरिया मैनेजर अजय कुमार शर्मा ने बताया कि यहाँ पर आनेवाले लोग दर्द से कराहते आये और हँसते हँसते वापस हुए चार आदमी द्वारा लाद कर लाये गये और अब खुद सीढ़ी चढ़ कर यहाँ तक पहुँचते हैं। यहाँ के कुछ लोगों से बातचीत से पता चला कि सारे के सारे यहाँ के काम से पूरी तरह से संतुष्ट हैं मैंने खुद भी यहाँ से थेरेपी लिया और अभी भी ले रहा हूँ और पूर्णतया संतुष्ट हूँ सेराजेम थेरेपी में रीढ़ की हड्डी की मशीन द्वारा मसाज की जाती है यह मशीन स्वचालित होती है जो जहाँ ज्यादा जरुरत है वहां उसी अनुरूप मसाज करती है मतलब आप आसानी से इस बात को समझ सकते हैं कि यह एक स्मार्ट मशीन है जो रीढ़ को स्कैन कर के खुद ही यह ढूँढ़ निकालती है कि कहाँ पर और किस तरह का पॉइंट्स देना है। अब जो व्यक्ति अपनी बीमारी के कारण सेराजेम सेंटर तक आने में असमर्थ है वह इस मशीन को अपने घर भी ले जा सकते हैं। शहर में बिना दवाई के इस थेरेपी से स्वास्थ्य सुधार होता है इसलिए पूरा विश्व इस पद्धति में विश्वास कर रहा है।

Sallauddin Ali

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