ब्रेकिंग न्यूज़स्योहारा-बिजनोर-उत्तरप्रदेश

युवती से शादी का झांसा दुष्कर्म,दहेज की मांग और धोखाधड़ी का मामला पहुँचा-महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग।

WhatsApp Image 2026-04-18 at 09.08.39
previous arrow
next arrow

युवती से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म, दहेज की मांग और धोखाधड़ी का मामला पहुँचा महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग।

स्योहारा (बिजनौर), 1 जून 2025
जनपद बिजनौर के थाना स्योहारा क्षेत्र में एक युवती के साथ शादी का झांसा देकर यौन शोषण, दहेज की मांग, शारीरिक उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर मामला न्याय की मांग को लेकर अब राष्ट्रीय महिला आयोग तथा उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है।
आप को बताते चलें कि
पीड़िता निवासी,थाना स्योहारा, जनपद बिजनौर, ने आरोप लगाया है कि हिमांशु वर्मा पुत्र जगदीश वर्मा निवासी स्योहारा द्वारा पहले प्रेम संबंध स्थापित कर विवाह का झूठा वादा किया गया इस धोखे की आड़ में आरोपी द्वारा लंबे समय तक पीडिता का शारीरिक शोषण किया गया जब पीडिता द्वारा विवाह का दबाव डाला गया तो आरोपी ने 03-09-2024 को बिजनोर स्थित एक मंदिर मे एक अधिवक्ता की उपस्थिति में विवाह सम्पन्न किया मगर पीड़िता को न तो सामाजिक मान्यता मिली और न ही वैवाहिक अधिकार प्रदान किये गए जब दिनाक 22 अप्रैल 2025 को पीड़ित अपने पति हिमाशु के घर ससुराल पहुंची तो हिमांशु के परिवार वालो ने ₹5 लाख नकद, एक कार,महंगे उपहार और दहेज की मांग करते हुए मारपीट कर घर से निकाल दिया जिसके उपरान्त
पीड़िता और उसके परिवार द्वारा स्योहारा थाने में एक शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई गई मगर पुलिस की निष्क्रियता से आहत पीड़िता ने जब न्यायिक और प्रशासनिक दरवाज़ों से राहत नहीं पाई, तो मानवाधिकार आयोग व महिला आयोग से न्याय की गुहार लगाई है
वही सामाजिक कार्यकर्ता वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के राष्ट्रीय महासचिव डॉ तारिक़ ज़की द्वारा दिनांक-30-मई 2025 को दैनिक पब्लिक इमोशन समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार “युवती को बनाकर शिकार, रिश्ता कर दिया दरकिनार “को पढ़ने के उपरांत मे व्यक्तिगत रूप से पीड़िता के सम्पर्क मे आये और प्राप्त तथ्यों के आधार पर
मामले को दिनांक 31 मई 2025 को राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसे रसीद संख्या 2014111662700 के तहत स्वीकार किया गया है। साथ ही, उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए डायरी संख्या 3458/IN/2025 के तहत दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।

डॉ. तारिक ज़की ने इस प्रकरण को महिला और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन की संज्ञा देते हुए कहा कि,

“यह केवल एक युवती का मामला नहीं, बल्कि समाज की संरचना और न्यायिक व्यवस्था की परीक्षा है। हम मांग करते हैं कि दोषियों पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं – धारा 376 (बलात्कार), धारा 417 (धोखाधड़ी), धारा 498A (घरेलू प्रताड़ना), और धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।” तथा

  1. पीड़िता की शिकायत पर त्वरित एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए।
  2. आरोपी और उसके परिजनों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाए।
  3. पीड़िता को कानूनी, मानसिक एवं आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
  4. संबंधित थाना पुलिस के अधिकारियों पर प्रशासनिक अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
  5. पीड़िता की सामाजिक पुनर्स्थापना सुनिश्चित की जाए।
    फिलहाल पीड़िता और उसके परिजन राष्ट्रीय महिला आयोग तथा राज्य मानवाधिकार आयोग से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पीड़ितों को न्याय समय पर मिल पा रहा है, या उन्हें सामाजिक व कानूनी व्यवस्था से भी जूझना पड़ता है?
100% LikesVS
0% Dislikes

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button