शिव आराधना करने वाला भक्त कभी दुखी नहीं रहता

शिव आराधना करने वाला भक्त कभी दुखी नहीं रहता
कन्नौज
भगवान शिव की आराधना करने वाला भक्त कभी दुखी नहीं रहता। भगवान भोलेनाथ हर भक्त की सुनते हैं। भोले की भक्ति में शक्ति होती है। भगवान भोलेनाथ कभी भी किसी भी मनुष्य की जिंदगी का पासा पलट सकते हैं। बस भक्तों को भगवान भोलेनाथ पर विश्वास करना चाहिए और उनकी प्रतिदिन आराधना करनी चाहिए।
उक्त सत्संग ग्राम पंचायत गुगरापुर के पंचायत भवन में दीक्षित नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डा. सुधीर दीक्षित द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस में श्री धाम वृंदावन से पधारे आचार्य आदित्य मनोहर पांडेय के श्री मुख से कथा प्रांगण में उपस्थित भक्तो के समक्ष दिया। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी निर्णय करो सोच समझकर समझदारी से करना चाहिए और समय का इंतजार करना चाहिए।वर्तमान में सबसे ज्यादा न्यायालय में तलाक के केस चल रहे हैं जो काफी शर्मनाक है।
इंसान खराब नहीं होता उसका समय होता है खराब’
कथा के तीसरे दिन भक्तों को कथा व्यास ने कहा कि इंसान कभी भी खराब नहीं होता उसका समय खराब होता है इसलिए समय को समझें और ऐसे समय को निकलने दें। यह एक समय चक्र होता है, जो हर इंसान की जिंदगी में आता है इसलिए ऐसे खराब समय में विवेक से कार्य करें।उन्होंने बताया कि आज वर्तमान में हमारी बेटियां बहुत आगे बढ़ रही हैं और नाम रोशन कर रही हैं। इसलिए हमारी बेटियों को कभी भी कमजोर नहीं समझा जाए।
भैरव करते है शिव भक्त के दुखों का भक्षण’
कथा वाचक श्री पांडेय ने बताया कि कथा कहती है कि भगवान शिव के अंश रूप भैरव हैं, भैरव क्षेत्र के देवता होते हैं तथा 64 तरह के भैरव और भैरवी होते हैं। राजस्थान में भैरव भगवान के पूजन का विशेष महत्व है। कथा के अनुसार, भैरव का मुख्य कार्य भगवान महादेव जब नेत्र बंद करके साधना में लीन रहते हैं और जब कोई भक्त शिवालय में महादेव का पूजन और अराधना करता है तब भैरव उस भक्त के दुख को भक्षण कर उसको सुखी करके शिवालय से भेजता है। शिवालय के दो द्वारपाल मणिभद्र और वीरभद्र है।
उन्होंने बताया कि शिव मंदिर में भैरव के दर्शन शिवालय के निज मंदिर की चौखट के ऊपर होते हैं। उन्होंने कहा कि भैरव और भैरवी का मुख्य कार्य मनुष्य में जब अंहकार व क्रोध आ जाता है तब वह उसमें समा जाते है।
‘मां सरस्वती में भैरवी आयी तब वह सावित्री बनी’
कथा कहती है कि ब्रह्माजी को थोड़ा अंहकार आ गया कि वह जगत कल्याण के लिए आयोजित यज्ञ करके संपूर्ण देवताओं को दिखाना है यह यज्ञ वे कर सकते हैं। तब काल भैरव ने मां लक्ष्मी से कहा कि ब्रह्मा जी सरस्वती जब श्रृंगार करने यज्ञ के समय पुष्कर में जाएंगी तब 64 भैरवी में से 1 भैरवी सरस्वती के अंदर सावित्री का रूप ले लेंगी और उसी सावित्री मां ने ब्रह्माजी को श्राप दे दिया कि उनका मंदिर व पूजा पुष्कर के अलावा कहीं नहीं होगी।
भगवान शिव व उनके अवतार की 3 परिक्रमा की जाती है
श्री पांडेय ने बताया कि भगवान शिव व उनके अंश रूप हनुमान जी, भैरव व सहित सभी उनके अंश अवतारों की 3 परिक्रमा की जाती है। शिवलिंग की आधी परिक्रमा कर नंदी दर्शन कर पुन: लौटने पर परिक्रमा पूरी मान ली जाती है। इसी तरह तीन बार आधी परिक्रमा पर नंदी दर्शन करने से तीन परिक्रमा पूरी मान ली जाती है। बिना नंदी दर्शन के भगवान शिव की परिक्रमा पूरी नहीं मानी जाती है।
‘सभी के घर में एक शिवलिंग जरूर हों’
कथा में आचार्य आदित्य मनोहर ने बताया कि सभी के घर में एक शिवलिंग जरूर होना चाहिए। घर में जब शिवलिंग नहीं हो तब भक्त दीपक जलाये, उससे जो ज्योति निकलती है उसकी आकृति लिंग के रूप की होती है तब उस समय ज्योतिलिंग का स्मरण करो और अपने कार्य की सफलता की कामना करो।
भगवान शंकर भूत प्रेत, पशु-पक्षियों, देवताओं व राक्षसों के देवता’
आचार्य पांडेय ने कहा कि भगवान शंकर भूत-प्रेत, पिशाच, पशु-पक्षियों, देवताओं, असुर व राक्षसों के देवता है। कथा कहती है कि महादेव को जैसे रिझाओंगे वैसे ही शंकर रिझ जाते हैं। शिवजी की पूजन में कोई गलती व कमी नहीं होनी चाहिए, ये लोग कहते हैं, लेकिन अगर आप शिव को दिल से कहो और पुकारो तो महादेव उसे दिल से सुनेंगे। भोलेनाथ कभी भक्त की कोई गलती व कमी नहीं देखते हैं।
इस अवसर पर मुख्य यजमान डा. सुधीर दीक्षित, प्राची दीक्षित, सिद्धार्थ गुप्ता, अतुल गुप्ता,ललित मोहन सिंह, संजीव गुप्ता संजू , गगन मनीष, शैलेष दीक्षित सहित कई लोग मौजूद रहे।


















