जोशीमठ के बाद कर्णप्रयाग में आई दरारें, 8 परिवारों को घर खाली करने के नोटिस

उत्तराखंड कर्णप्रयाग आईरा न्यूज़ नेटवर्क
राजेश सिंघल
जोशीमठ के बाद अब चमोली जिले का कर्णप्रयाग भी दरारों की जद में आ गया है। लगातार हो रही दरारों से शासन प्रशासन की नींद उड़ गई है। अब कर्णप्रयाग में आठ घरों की हालत खतरनाक बनी हुई है। जिसे देखते हुए इन घरों में रहने वाले आठ परिवारों को घर खाली करने का नोटिस दिया गया है।
कर्णप्रयाग में राजनगर, गांधीनगर, बहुगुणानगर, आइटीआइ और अपर बाजार रामलीला मैदान से मस्जिद परिसर तक भूधंसाव का खतरा मंडरा रहा है। वहीं 60 के करीब घरों में दरारें भी आ गई हैं
जोशीमठ की हालत देख कर्णप्रयाग में भी शहरवासियों की चिंता बढ़ गई है। 14 हजार की आबादी वाले कर्णप्रयाग के स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि वर्ष 2012 में मंडी समिति के भवन निर्माण के दौरान जेसीबी मशीनों से खोदाई की गई। उसी समय से नगर में भूधंसाव शुरू हो गया और लगातार मकानों में दरारें बढ़ने लगी। इसके बाद कई लोगों ने किराये के भवनों में रहना शुरू कर दिया। शहर में निकासी नालियों की व्यवस्था न होने से जरा सी बारिश होने पर पानी का रुख आबादी की ओर होने से भूधंसाव का खतरा बना रहता है।
विकास के नाम पर विनाश के कगार पर पहुंचे
उत्तराखंड में विकास के नाम पर विनाश के दरवाजे खोले जाते रहें हैं! करीब तीन दशक पहले पहाड़ो में पत्थर लकड़ी व तीन के घर हुआ करते थे और अब पहाड़ काटकर बड़ी बड़ी इमारतें बनाई जाने लगी हैं पहाड़ के कोने कोने से लेकर रोड तक सबसे बड़ा सवाल यह भी हैं कि आखिर इने बनाने की इजाज़त कौन देता हैं?उत्तराखंड के जोशीमठ में हो रहे भूस्खलन के लिए भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट और पर्यावरणविदों की चेतावनी तथा आंदोलनों के बाद भी सरकार के समय रहते नहीं जागने का दुष्परिणाम आज स्थानीय लोग भुगत रहे है
जो अपने घर जमीन खेती-बाड़ी को अपने सामने समाप्त होते देख रहे हैं। आखिर इन सब का जिम्मेदार कौन है।


















