इंसान अपनी बेलगाम इच्छाओं को पाने के लिए कभी कभी सब कुछ दाव पर लगा देता है
दिल्ली-शादाब इलयास

दिल्ली-इंसान अपनी बेलगाम इच्छाओं को पाने के लिए कभी कभी सब कुछ दाव पर लगा देता है और आखिर में उसके पास कुछ नहीं बचता और बची उम्र तरसता रह जाता है
जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, भारत में ब्रिटिश कल्चर से प्रभावित होता चला गया। मैंने इंग्लिश बोलना ग्रेसफुली सूट पहनना सीख लिया, बड़े-बड़े लोगों से दोस्ती भी हो गई लेकिन मेरा परिवार मुझसे बिल्कुल उलट था, पिता जी एक किसान है मैं अपने दोस्तों की झूठी चमक धमक के सामने अपने परिवार को इग्नोर करता गया
लेकिन वक्त बीतता गया मेरी शादी हो गई और मैं दिल्ली शिफ्ट हो गया अलहमदुलिल्ला आज मेरे तीन बच्चे हैं बच्चों की मोहब्बत देख कर मुझे एहसास हुआ की हम भी किसी बैठे हैं और जिस तरह हम मोहब्बत करते हैं उसी तरह उन्होंने भी हमसे मोहब्बत की है और हमने उन्हें क्या दिया कभी उनके दुख दर्द में साथ खड़े नहीं रहे इनकी खैरियत नहीं पूछी कभी उनसे उनका हाल नहीं पुछा कभी कबार चलते हुए खैरियत मालूम कर भी ली तो बहुत बड़ा काम कर लिया लेकिन कभी बैठ कर उन्हें समझने की कोशिश नहीं की अब वक्त बहुत दुर निकल गया और मसरूफियत डबल हो गई ऐसे हालात में दोनों को संभालना मेरे लिए मुश्किल हो गया यह मेरे अकेले की नहीं बल्कि ज्यादातर माशरे के समस्या है की हम अपने बड़ों को टाइम नहीं दे पा रहे और उनके तजुर्बा और खिदमत से दूर होते चले जा रहे है
मैं वह बदनसीब बेटा हूं जो अपने मां-बाप की एक लंबी उम्र में खिदमत नहीं कर पाया अल्लाह पाक हम सबको अपने मां-बाप की खिदमत करने की तोफीक अता फरमाए आमीन
जबकि हम लोग अपनी झूठी शान के लिए अपने मां-बाप को छोड़ देते हैं झूठी शान के लिए जो खुद से प्यार करते हैं, वे कभी किसी और को प्यार नहीं दे सकते।
मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा सबक है-आप जिन्हें प्यार करते हैं, उन्हें बदलने की कोशिश ना करे वो जैसे हैं, उन्हें वैसे ही प्यार करे।’


















