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धामपुर में बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद में नया मोड़-एडवोकेट हरिओम सिंह ने राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज की शिकायत

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📰 धामपुर में बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद में नया मोड़-एडवोकेट हरिओम सिंह ने राज्य मानवाधिकार आयोग में दर्ज की शिकायत

उपजिलाधिकारी का रवैया सामाजिक समरसता एवं अल्पसंख्यक अधिकारों के विरुद्ध” – एडवोकेट हरिओम सिंह (WAOHR)

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📅 20 जून 2025 | बिजनौर

धामपुर में स्थित शीला टॉकीज़ तिराहे पर डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा स्थापना को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। एडवोकेट हरिओम सिंह, जो वर्ल्ड एक्रेडिटेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स (WAOHR) के राष्ट्रीय सलाहकार हैं, ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी धामपुर के खिलाफ उत्तर प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग, लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई है।

इस शिकायत को आयोग ने गंभीरता से लेते हुए डायरी संख्या 4094/IN/2025 पर स्वीकार किया है और केस नंबर 13563/24/17/2025 के तहत जांच की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

📌 शिकायत के मुख्य बिंदु:

एडवोकेट हरिओम सिंह के अनुसार,
07 मई 2025 को प्रतिमा स्थापना के लिए विधिवत आवेदन किया गया था, परंतु धामपुर प्रशासन ने न तो अनुमति दी और न ही सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की।

यह आयोजन बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक समिति द्वारा प्रस्तावित था और संबंधित अधिकारियों को इसकी पूर्व जानकारी दी जा चुकी थी।

⚖️ “प्रशासन का यह रवैया संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन”

एडवोकेट सिंह ने इसे न केवल शांतिपूर्ण सामाजिक गतिविधियों में बाधा बताया, बल्कि समानता, सामाजिक न्याय एवं अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करार दिया।

📝 आयोग के समक्ष तीन प्रमुख मांगें प्रस्तुत:

1️⃣ 30 जून 2025 को प्रस्तावित कार्यक्रम हेतु तत्काल प्रशासनिक अनुमति दी जाए।
2️⃣ प्रतिमा स्थापना कार्यक्रम हेतु पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
3️⃣ संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच व कठोर कार्रवाई की जाए।

राज्य मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवश्यक दस्तावेज स्वीकार कर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

✍️ एडवोकेट हरिओम सिंह ने कहा एक ओर जहां समस्त जांचोपरांत जिलाधिकारी बिजनौर द्वारा प्रदत्त अनुज्ञा का उल्लंघन है,वहीं दूसरी ओर सरकार अनुसूचित जाति के लोगों को साधने में लगी है,प्रशासनिक अमला सरकार की मंशा पर पानी फेरता नज़र आ रहा है।।

“यह मामला केवल प्रतिमा स्थापना का नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का भी विषय है। आयोग से हमें न्याय की अपेक्षा है।”

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