जल का उत्सव,जन भागीदारी का संकल्प – सी आर पाटील

विश्व जल दिवस जल संरक्षण से ही सुरक्षित होगा भविष्य- सी आर पाटील ||
जल है जीवन की आधारशिला, संरक्षण है हम सबकी जिम्मेदारी – सी आर पाटील ||
जल संकट से समाधान तक भारत की समग्र जल नीति का संकल्प ||
जनभागीदारी से जल क्रांति हर बूंद बचाने का राष्ट्रीय अभियान ||
जल बचाएँ,भविष्य सजाएँ विकसित भारत की ओर एक कदम ||
वाराणसी:- प्रत्येक वर्ष 22 मार्च को मनाए जाने वाले विश्व जल दिवस के अवसर पर मैं सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ यह दिन हमें याद दिलाता है कि जल केवल एक संसाधन नहीं,बल्कि जीवन की आधारशिला है और इसका संरक्षण हम सभी की साझा जिम्मेदारी है | जल हमारे जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और अर्थव्यवस्था की धुरी है विश्व की लगभग 18 प्रतिशत जनसंख्या और पशुधन भारत में निवास करते हैं जबकि हमारे पास वैश्विक मीठे जल संसाधनों का मात्र चार प्रतिशत ही उपलब्ध है | शहरीकरण,बढ़ती मांग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के बीच जल का प्रभावी प्रबंधन आज एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुका है | इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने जल प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है | जल शक्ति मंत्रालय की स्थापना से जल से जुड़े विभिन्न विभागों का एकीकरण हुआ है जिससे योजनाओं के बेहतर और समन्वित क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त हुआ है | यह दृष्टिकोण जल के पूरे चक्र को साथ लेकर चलता है एक ओर संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर बल दिया जा रहा है वहीं बांधों और जलाशयों के माध्यम से भंडारण क्षमता को मजबूत किया जा रहा है | नदी जोड़ परियोजनाएँ संतुलित जल-वितरण की दिशा में प्रयास कर रही हैं | जल जीवन मिशन और कमांड एरिया विकास के आधुनिकीकरण से जल की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है जबकि नमामि गंगे जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जल गुणवत्ता सुधारने का कार्य आगे बढ़ रहा है साथ ही अनुसंधान,नवाचार और जन जागरूकता के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया है |
इस पूरे प्रयास का मूल भाव है जन भागीदारी प्रधानमंत्री जी ने जलसंचय को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया है सरकार दिशा और संसाधन उपलब्ध करा सकती है लेकिन स्थायी परिवर्तन तभी संभव है जब समाज स्वयं इसमें भागीदार बने | जल जीवन मिशन इसी सोच का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल पहुंचाना है | आज 15.8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल से जल की सुविधा पहुंच चुकी है जिससे जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है |
इस मिशन का एक बड़ा प्रभाव महिलाओं के जीवन में दिखाई देता है पानी लाने के श्रम में कमी आई है स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और शिक्षा तथा आजीविका में उनकी भागीदारी बढ़ी है | ग्राम पंचायतों और स्थानीय जल एवं स्वच्छता समितियों की भूमिका से समुदाय का जुड़ाव मजबूत हुआ है वहीं फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता की निगरानी में महिलाओं की भागीदारी ने स्थानीय स्वामित्व को और सुदृढ़ किया है |
नमामि गंगे कार्यक्रम ने गंगा और उसकी सहायक नदियों में जल गुणवत्ता सुधारने और पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है | निर्मल और अविरल गंगा के साथ-साथ “अर्थ गंगा” और “जन गंगा” जैसी पहलें नदी संरक्षण को लोगों के जीवन और आजीविका से जोड़ती हैं | कैच द रेन अभियान और जल संचय–जन भागीदारी जैसे प्रयासों ने जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया है | वर्षा जल संचयन,पारंपरिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन,बोरवेल रिचार्ज और चेक-डैम निर्माण जैसे कार्यों में लोगों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है | सितंबर 2024 से अब तक देशभर में 45 लाख से अधिक वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण इसी सामूहिक प्रयास का परिणाम है यह दिखाता है कि जब सरकार और समाज साथ मिलकर काम करते हैं तो परिवर्तन व्यापक और स्थायी होता है |
देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे कई प्रेरक उदाहरण सामने आए हैं |गुजरात के बनासकांठा में डेयरी सहकारी समितियों और किसानों ने मिलकर कम लागत वाले रिचार्ज पिट बनाए हैं | छत्तीसगढ़ के कोरिया में किसानों ने अपनी भूमि का एक हिस्सा भूजल पुनर्भरण के लिए समर्पित किया है शहरी क्षेत्रों में भी आवासीय परिसर वर्षा जल संचयन और पुनः उपयोग को अपनाने लगे हैं | उद्योग जगत भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है जल ऑडिट,पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग,जीरो लिक्विड डिस्चार्ज और वर्षा जल संचयन जैसी प्रथाओं को अपनाकर उद्योग जिम्मेदार जल प्रबंधन की दिशा में योगदान दे रहे हैं |
कृषि क्षेत्र में भी जल के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग की दिशा में बदलाव दिखाई दे रहा है | माइक्रो-इरिगेशन,खेत स्तर पर बेहतर जल प्रबंधन और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसी पहलें न केवल किसानों की आय को सुदृढ़ करती हैं बल्कि दीर्घकालिक स्थिरता को भी बढ़ावा देती हैं | जल संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना समय की मांग है वर्षा जल संचयन,उपचारित जल का पुनः उपयोग और पानी की बर्बादी को रोकना ये ऐसे कदम हैं जिन्हें अपनाकर हम अपने शहरों को अधिक जल-सुरक्षित बना सकते हैं |
भारत की जल सुरक्षा की यह यात्रा एक सामूहिक राष्ट्रीय प्रयास है यह केवल नीतियों और अवसंरचना से नहीं,बल्कि हमारे व्यवहार और सोच में बदलाव से ही संभव है | आइए इस विश्व जल दिवस पर हम जल संरक्षण को अपनी आदत में लाएँ और अपने दैनिक क्रियाकलापों में शामिल करें यदि प्रत्येक नागरिक प्रतिदिन केवल एक लीटर जल भी बचाए या उसका पुनः उपयोग करे तो हम एक राष्ट्र के रूप में प्रतिदिन 140 करोड़ लीटर से अधिक जल बचा सकते हैं | जल संरक्षण को प्रयास नहीं,बल्कि स्वभाव बनाना होगा तभी जल सुरक्षित विकसित भारत का लक्ष्य साकार होगा (लेखक भारत सरकार में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री हैं) ||


















